पितृ पक्षके दिन बेहद पवित्र और संयम वाले माने गए हैं. इस दौरान मांसाहार, शराब, नशीली चीजों और अत्यधिक तामसिक भोजन से परहेज करने को कहा जाता है. पितरों के भोजन में लहसुन प्याज आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

भूलकर भी पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों की उपेक्षा करना पितृ दोष को न्यौता देने के समान है. पूर्वजों से संबंधित किसी भी कार्य में क्लेश न करें, इससे पूर्वज नाराज होते हैं ऐसी मान्यता है.

पितृ पक्ष केवल मृत पूर्वजों को याद करने का समय नहीं, बल्कि परिवार की पितृ परंपरा के प्रति सम्मान जताने का अवसर भी माना जाता है. इसलिए जीवित माता-पिता, दादा-दादी और घर के बुजुर्गों का अपमान, कटु वचन या कर्म-मन से दिल न दुखाएं.इनते अनादर को पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है.

पितृ पक्ष में केवल पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि आचरण की शुद्धता पर भी जोर दिया जाता है. छल-कपट करना, हिंसा करना, अपशब्द कहना या अनैतिक कार्यों में शामिल होना पूर्वजों को नाराज कर सकता है. इससे श्राद्ध का फल नहीं मिलता.

पितरों का वास पक्षियों और जीवों में माना जाता है, ऐसे में कौवे, गाय या कुत्ते को भगाने या सताने से बचना चाहिए. पितृपक्ष में श्राद्धकर्म करने वाले व्यक्ति को पूरे 15 दिनों तक बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए. साथ ही इन लोगों को ब्रह्माचार्य का पालन भी करना चाहिए.

पूर्वज नाराज हो जाएं तो परिवार में मांगलिक कार्य में बाधाएं आती है. स्वास्थ समस्या बनी रहती है. वंश वृद्धि में रुकावट होती है. आर्थिक, मानसिक रूप से परिवार की 7 पीढ़ियों को इसका परिणाम भुगनता पड़ता है ऐसी मान्यता है.
Published at : 18 Sep 2026 10:10 AM (IST)
