कर्नाटक की राजनीति में शिवशंकरप्पा एस. साहूकार की कहानी अनोखी है. राजनीतिक संरक्षण के बीच कथित भ्रष्टाचार का अहम मामला सामने आया है. जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के चेयरमैन साहूकार को 25 अगस्त को 2 बड़े खुलासों के बाद सस्पेंड कर दिया है.
पहला मामला उनकी बेटी से जुड़ा है, जहां उनकी बेटी को राज्य उद्योग और वाणिज्य विभाग में नौकरी मिली. हालांकि इसके लिए उसने कथित तौर पर अपने पिता की आय कम दिखाने के लिए फ़ॉर्म में हेरफेर की. दूसरा मामला- पशु चिकित्सक (वेटेरिनेरियन) की 400 नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए पेपर लीक से जुड़ा है. ये दोनों ही घटनाएं एक पैटर्न का हिस्सा थीं.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक KPSC में साहूकार के 7 साल के कार्यकाल जिसमें उन्हें 2019 में सदस्य और 2021 में BJP सरकार द्वारा चेयरमैन नियुक्त किया गया था इसके दौरान कई कथित अनियमितताएं हुईं. इन अनियमितताओं की ओर KPSC के वरिष्ठ अधिकारियों ने 4 बार ध्यान दिलाया था और ये वो समय था जब कर्नाटक में BJP और कांग्रेस दोनों की सरकारें रहीं. 61 साल के साहूकार को साफ तौर पर दोनों ही पार्टियों से संरक्षण मिला हुआ था.
असल में उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया ही विवादों से भरी थी और जांच से पता चला है कि कैसे एक अनौपचारिक मनी लेंडर (बिना लाइसेंस के पैसे उधार देने वाला व्यक्ति) को राज्य की सबसे ताकतवर संवैधानिक संस्थाओं में से एक का प्रमुख बना दिया गया, जिसका काम प्रतिष्ठित सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती करना था.
बीजेपी सरकार में पहले हुई नियुक्ति
31 अगस्त 2019 को जब बीजेपी के येदियुरप्पा ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तो उसके ठीक 36 दिन बाद साहूकार को KPSC में दो गैर-सरकारी सदस्यों के साथ ‘सरकारी’ श्रेणी में नियुक्त किया गया. बाद में साहूकार को ‘गैर-सरकारी’ श्रेणी में भेज दिया गया क्योंकि इस बात पर आपत्ति जताई गई थी कि उन्होंने कभी सरकारी पद नहीं संभाला था.
कौन हैं साहूकार
KPSC के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 1988 में रायचूर कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग से एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने जनवरी 1989 से अगस्त 1991 के बीच सुपरवाइज़र के तौर पर काम किया. 5 साल के गैप के बाद जुलाई 1996 में उन्होंने गुलबर्गा में नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) के एक प्रोजेक्ट में फॉर्म गाइडेंस इंस्ट्रक्टर के तौर पर कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी शुरू की. इन रिकॉर्ड्स में यह बात नहीं बताई गई है कि मार्च 2010 में NCUI ने साहूकार का कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2011 के बाद न बढ़ाने का फैसला किया और उनसे पूरा चार्ज सौंपने को कहा. इसकी वजह उनका काम संतोषजनक न होना और समय के पाबंद न होना बताया गया है.
कांग्रेस में भी रसूख कायम रहा
मई 2023 में जब कांग्रेस सत्ता में लौटी और सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री का पद संभाला, तब तक साहूकार का IAS अधिकारी विकास सुरलकर के साथ टकराव चल रहा था. सुरलकर जुलाई 2022 से KPSC के सेक्रेटरी थे. सुरलकर ने पारदर्शिता लाने के लिए कई कदम उठाए थे, जैसे कि KPSC के लिए आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट बनाना और KPSC की वेबसाइट पर भर्ती से जुड़ी ज्यादा जानकारी देना.
मामला तब और बिगड़ गया जब 2023 में साहूकार ने फाइलों को मंजूरी देने में देरी करनी शुरू कर दी और मीटिंग्स आयोजित करने में सेक्रेटरी को नज़रअंदाज़ करने लगे. जून 2023 में KPSC चेयरमैन ने सेक्रेटरी के ख़िलाफ़ नए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और अगस्त में मुख्य सचिव से औपचारिक शिकायत की. कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए सुरलकर ने कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उन्होंने सिस्टम की कमियों की ओर इशारा किया.
कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने 25 अगस्त को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते साहूकार को KPSC के चेयरमैन पद से सस्पेंड कर दिया. यह कदम राज्य कैबिनेट की ओर से विवादों में घिरे चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के बाद उठाया गया है.
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