धान की फसल में अगर पत्तियां अचानक पीली पड़ने लगें तो किसान को इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसका कारण पोषक तत्वों की कमी, पानी का गलत प्रबंधन, रोग या कीट का प्रकोप हो सकता है. खासतौर पर भूरा माहू धान की फसल के लिए नुकसानदायक कीटों में शामिल है. इसका प्रकोप बढ़ने पर पौधे कमजोर होकर सूखने लगते हैं और खेत में बड़े हिस्से में फसल प्रभावित हो सकती है.
क्या होता है भूरा माहू?
भूरा माहू छोटा, भूरे रंग का कीट होता है, जो धान के पौधे के निचले हिस्से और तने के पास रहकर रस चूसता है. इसका पता लगाने के लिए पौधे को नीचे से ध्यान से देखना चाहिए. कई बार पौधे के तने के आसपास बड़ी संख्या में छोटे कीड़े दिखाई देते हैं. भूरा माहू पौधे से रस चूसता है, जिससे पौधे में पोषक तत्वों और पानी का प्रवाह प्रभावित होता है. प्रकोप बढ़ने पर पौधे मुरझाने लगते हैं और आखिर में पूरा हिस्सा सूखकर भूरे रंग का दिखाई देने लगता है.
पत्तियां पीली होने के अन्य कारण भी होते हैं
धान की पत्तियां पीली होने का मतलब हमेशा भूरा माहू का हमला नहीं होता. अगर खेत में पौधों की निचली पत्तियां पहले पीली हो रही हैं और पौधों की बढ़वार कमजोर है, तो नाइट्रोजन की कमी भी एक कारण हो सकती है. वहीं खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहने, जड़ों को नुकसान होने या कुछ अन्य रोगों के कारण भी पौधों का रंग बदल सकता है.
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कैसे लगता है भूरा माहू?
धान के खेत में अत्यधिक नमी, घनी फसल और जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन वाले खाद का इस्तेमाल माहू की समस्या को बढ़ाता है. किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए. पौधों के निचले हिस्से को हाथ से हिलाकर या पौधे को हल्के से थपथपाकर भी कीट की मौजूदगी देखी जा सकती है.
ऐसे करें फसल का बचाव
अगर भूरा माहू दिखाई दे तो सबसे पहले खेत में पानी की व्यवस्था पर ध्यान दें. आवश्यकता से अधिक पानी को खेत में लंबे समय तक भरा नहीं रहने देना चाहिए. खेत में पर्याप्त दूरी और हवा का आना-जान होना बेहतर होता है. वहीं खेत की मेड़ों और आसपास खरपतवार न उगने दें. अनावश्यक यूरिया का इस्तेमाल न करें.
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