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बाब अल मंदेब, क्या है अभी स्थिति, खुला है या बंद है, क्या सऊदी तेल गुजर रहे हैं


हूती विद्रोहियों ने जब से सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोला है, तब से हॉर्मुज की तरह ही एक और समुद्री मार्ग चर्चा में आ गया है. स्ट्रेट ऑफ बाब अल मंदेब, जिसको लेकर इंटरनेशनल मीडिया में जानकारी है कि यह कानूनी तौर पर बंद तो नहीं है, लेकिन असल में इस पर पाबंदियां लगी हुई हैं.

अलजजीरा की मानें तो यहां से गुजरने वाले सऊदी अरब से जुड़े तेल के शिपमेंट बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. इस अहम रास्ते (चोकपॉइंट) के पास हूती विद्रोहियों की समुद्री नाकेबंदी और मिलिट्री कंट्रोल के बाद से काफी हद तक रुक गए हैं. आइए विस्तार से समझते हैं, इस रास्ते से जुड़ी जानकारी के बारे में. 

अल मंदेब से जुड़े फैक्ट्स

स्ट्रेट ऑफ बाब अल मंदेब को बाब अल मंदाब भी कहा जाता है. यह एक ग्लोबल चोकपॉइंट है, जो अरेबियन पेनिनसुला और अफ्रीका में जिबूती-इरिट्रिया के बीच स्थित है. यह ऐसा समुद्री जलमार्ग है, जो लाल सागर यानी Red Sea को गल्फ ऑफ एडेन (अदन की खाड़ी) और हिंद महासागर को जोड़ता है. बाब अल मंदेब का नाम अरबी भाषा में रखा गया है. मंदाब का अर्थ दुख या शोक होता है. ऐसे में कहा जाता है कि इसका नाम इस समुद्री मार्ग से जुड़े खतरों के कारण पड़ा है, या फिर अरबों के बीच मान्यता है कि इस जगह पर कभी भूंकप आया और यहां कई लोगों की मौत हुई. इस प्राकृतिक आपदा ने अरेबियन पेनिनसुला को हॉर्न ऑफ अफ्रीका से अलग-थलग कर दिया था. 

अभी इस जगह पर क्या स्थिति है? 
यमन में इलाकाई कंट्रोल हाल ही में बदल गया है. हूती विद्रोही पश्चिमी तट पर आगे बढ़ रहे हैं.  बाब अल मंदेब में मायुन आइलैंड जैसे लाल सागर के द्वीपों सहित स्ट्रेटेजिक इलाकों पर कब्जा किया जा रहा है. यहां लाल सागर और अदन की खाड़ी में तनाव 20 जुलाई से बढ़ा हुआ है. हूती विद्रोहियों ने यमन में अपने कंट्रोल वाले इलाकों पर सऊदी नाकाबंदी के जवाब में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों पर समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी. इससे सऊदी की तेल सप्लाई पूरी तरह से ठप्प पड़ गई है. सऊदी का कहना है कि हम एक बार में इसे खत्म कर सकते हैं, लेकिन यमन के नागरिकों की चिंता है. 

तेल टैंकरों और सऊदी जहाजों पर अटैक किया

हूतियों ने इलाके के शिपिंग रास्तों पर तेल टैंकरों और सऊदी के जहाजों पर अटैक किया है. देश के अंदर सिविलियन एयरपोर्ट और एनर्जी प्रोडक्शन फैसिलिटी सहित कई जगह पर हमला किया है. इससे आम लोगों की मौत हुई है. सामान का नुकसान हुआ है. सऊदी अरब ने 2015 से यमन की इंटरनेशनल मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया है. वहीं, ईरान हूती विद्रोहियों का समर्थन करता आ रहा है. हूतियों ने 2014 से राजधानी सना सहित कई प्रांतों और शहरों पर कंट्रोल कर रखा है. इधर, हाल ही में काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल सिसी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच वार्ता हुई है. उन्होंने हॉर्मुज, बाब अल मंदेब और लाल सागर के माध्यम से किए जाने वाले नेविगेश की फ्रीडम को सुनिश्चित करने पर जोर दिया है. 

तीन साल पहले भी हूती ग्रुप ने नेविगेशन की दी थी धमकी

यमन के हूती ग्रुप ने इससे पहले लगभग तीन साल पहले बाब अल मंदेब से नेविगेशन की धमकी दी थी. यह लाल सागर से मिस्र की स्वेज नहर और आगे के भूमध्य सागर तक का गेटवे हैं. मिस्र के अधिकारियों की मानें तो उस वक्त लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों से नहर को करीबन 11 बिलियन का नुकसान हुआ था. यह मिस्र की विदेशी करेंसी के मुख्य सोर्स में से एक है. हूतियों ने करीब दो महीने पहले लाल सागर में शिपिंग को फिर से निशाना बनाना शुरू कर दिया था. इससे मिस्र ने एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले नहर सहित इंटरनेशनल समुद्री रास्तों में किसी भी रुकावट के नतीजों को लेकर चेतावनी दी थी.



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