अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने एंटी करप्शन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इसे लेकर अधिवक्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में वकीलों के पैनल ने चार्जशीट पर मंथन किया.
अधिवक्ताओं का आरोप है कि जिन लोगों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी, उन्हें ही मामले में गवाह बना दिया गया है. इसे लेकर वकीलों में नाराजगी है. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक पैनल ने चार्जशीट पर चर्चा की. करीब 70 मिनट तक चली बहस में अधिवक्ताओं ने विवेचना और चार्जशीट में कई कमियां होने का दावा किया.
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वकीलों ने चार्जशीट पर क्या कहा?
वकीलों का कहना है कि तत्कालीन राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन समेत कुछ लोगों के खिलाफ भी जांच की मांग की गई थी. आरोप है कि पहले अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया गया था कि इन लोगों को जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा, लेकिन अब चार्जशीट में इन्हें आरोपी बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया है.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने चार्जशीट में बरामदगी और केस प्रॉपर्टी को लेकर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि चोरी की रकम का स्पष्ट पता नहीं लगाया गया और जिन लोगों से बरामदगी का दावा किया गया, उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल हैं. अधिवक्ताओं ने करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट होने की बात कही, हालांकि उन्होंने खुद पूरी चार्जशीट नहीं देख पाने की बात भी कही है.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने और क्या कहा?
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद तिवारी ने आगे कहा कि मामले में चंपत राय, गोपाल राव, अनिल मिश्रा और कृष्ण मोहन हैं. जिन्हें मुलजिम बनाना चाहिए था लेकिन इनको उन्होंने गवाह बना दिया. गवाह बनाकर इनको सदा-सर्वदा के लिए मुक्त कर दिया. अब ये सारे लोग मिलकर के जो आठ लोग जेल में बंदी हैं, उनको बचा रहे हैं.
वकीलों ने जांच में शामिल एजेंसियों की मौजूदगी और भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने के बजाय आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, ये सभी आरोप अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए हैं.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने किया बड़ा दावा
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने दावा करते हुए कहा कि हमारी जो लीगल एक्सपर्ट्स की टीम है. उनमें बड़े-बड़े क्रिमिनल के लॉयर हैं. इन लोगों ने जो अपने तर्क रखे, उस तर्क का कोई जवाब न तो उनके सरकारी वकील ने दिया और न ही क्षेत्राधिकारी ने दिया. अब इस मामले में अधिवक्ताओं ने मांग की है कि चार्जशीट की दोबारा समीक्षा की जाए और जिन लोगों के खिलाफ शिकायत दी गई थी, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो.
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