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इस्तीफा, गिरफ्तारी, जेल…, ज्ञानेश कुमार पर भड़का विपक्ष, पढ़ें 10 नेताओं के तीखे हमले


क्या एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद हैं? क्या इस प्रक्रिया पर चुनाव आयोग की टीम बंटी हुई थी? इन सवालों ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. इसकी वजह एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयोग ने पिछले 10 महीनों में कई ऐसे फैसले लिए, जिन पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी सहमत नहीं थे.

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े कई बदलावों पर आपत्ति जताई थी. दावा किया गया है कि उन्होंने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार अपनी असहमति दर्ज कराई, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. दरअसल, चुनाव आयोग मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों का संयुक्त निकाय होता है.

ऐसे में यदि यह दावा सही है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया, तो सवाल उठता है कि क्या अहम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के स्तर पर ही लिए जा रहे थे.

रिपोर्ट से बवाल

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों में से चार ऐसे मुद्दे थे, जिनका सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया से था. इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने में नियमों की कथित अनदेखी, मतदाता सूची पर केंद्रीकृत नियंत्रण, पश्चिम बंगाल में करीब 34 लाख मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने के खिलाफ दायर अपील, और गोवा में 97 पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा न जोड़ने का मामला शामिल था. यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही हैं, तो विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या देश की चुनावी प्रक्रिया एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित हो गई है.

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी संस्थान में अलग-अलग राय और सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है. आयोग का कहना है कि इसे मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि यदि आपत्तियां दर्ज की गई थीं, तो उन पर क्या विचार हुआ और अंतिम निर्णय किस आधार पर लिए गए. यह मुद्दा केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली से भी जुड़ा हुआ है.

विपक्ष हुआ हमलावर

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जो कुछ किया जा रहा है, वह गलत है और देश के हितों के खिलाफ है. राहुल गांधी ने कहा, ‘वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक क्राइ महै. हमारे संविधान पर सीधा हमला है. इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसएस और इलेक्शन कमीशन ने देशद्रोह का काम किया है. इंसाफ जरूर होगा.’

सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए: कपिल सिब्बल

पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और पूरे प्रकरण की जांच होनी चाहिए. वहीं भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है और इसे संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

लोकतंत्र के लिए चिंताजनक: अखिलेश यादव

भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी धांधली और संस्थाओं के दुरुपयोग का इतिहास कांग्रेस से जुड़ा रहा है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यदि ऐसे आरोप सही हैं तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं.

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो कार्रवाई: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन किया जाएगा.

3 साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए: केजरीवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूरे मामले पर कहा है कि हमारी मांग है कि पिछले 3 सालों में जितने बदलाव वोटर लिस्ट के अंदर किए गए हैं, वे खारिज करके 3 साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए. 

लोकतंत्र में मनमानी नहीं चल सकती: उद्धव ठाकरे

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र में मनमानी नहीं चल सकती और संस्थाओं की निष्पक्षता बनी रहनी चाहिए. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि यह गंभीर सवाल है कि चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया आखिर कैसे काम कर रही है.

समय के साथ इलेक्शन कमीशन के भरोसे में कमी आई: ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कभी देश के अधिकांश लोगों को चुनाव आयोग पर पूरा भरोसा था, लेकिन समय के साथ उस भरोसे में कमी आई है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर पूछा कि यदि आयोग के अधिकांश सदस्य किसी फैसले से सहमत नहीं थे, तो ऐसे फैसलों की कानूनी वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

योगेंद्र यादव ने भी उठाए सवाल

योगेंद्र यादव ने इस पूरे मामले पर कहा है कि आज की खबर सिर्फ यह नहीं है कि चुनाव आयुक्तों में एसआईआर को लेकर गंभीर असहमति थी. बड़ा सवाल यहा है कि अगर दोनों चुनाव आयुक्त इन फैसलों को गलत या गैरकानूनी मानते थे, तो उन्हें रोकने के लिए क्या किया? क्या चुपचाप असहमति दर्जा करना पर्याप्त था. या यह भी जवाबदेही का सवाल है?

फिलहाल, रिपोर्ट में किए गए दावों और चुनाव आयोग के जवाब के बीच यह विवाद राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय बना हुआ है. चुनाव आयोग का कहना है कि संस्थान के भीतर विचार-विमर्श और अलग-अलग राय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है.

आप नेता मनीष सिसोदिया ने मांगा इस्तीफा

आप नेता मनीष सिसोदिया ने इस्तीफा मांगा है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा- ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो. 

महुआ मोइत्रा बोली- ज्ञानेश देशद्रोही कुमार की इतनी हिम्मत

टीएमसी एमपी महुआ मोइत्रा ने कहा है कि ज्ञानेश देशद्रोही कुमार की इतनी हिम्मत की उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से वोट चोरी के मामले में माफी मांगने या हलफनामा दाखिल करने को कहा. ज्ञानेश, तुम चोर हो. अब जब यह साबित हो चुका है, तो तुम देश से माफी मांगकर इस्तीफा क्यों नहीं देते? 



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