नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार को बड़ा झटका लगा है. पूर्व मेदिनीपुर जिले की एक अदालत ने मिलन प्रधान को 2007 के एक आपराधिक मामले में बुधवार को 7 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है. यानी इस आदेश के बाद वह उपचुनाव के लिए प्रचार नहीं कर पाएंगे. बंगाल उपचुनाव के लिए प्रचार 4 अक्तूबर को खत्म हो जाएगा, जबकि 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्तूबर को नतीजे जारी होंगे.
कोर्ट में प्रधान के वकील प्रसनजीत जना ने कहा कि प्रधान को पहले ही आर्म्स एक्ट के एक केस में पांच अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. अब नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान 2007 में दर्ज एक अन्य मामले में उन्हें हत्या और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है. इन आदेशों के चलते प्रधान के लिए अपना चुनाव प्रचार करने का मौका असम में खत्म हो गया है.
नंदीग्राम में 6 अक्तूबर को वोटिंग
बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी की खाली की गई नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को वोटिंग होनी है, जबकि प्रचार की आखिरी तारीख 4 अक्तूबर है. कांथी अदालत के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने हत्या के आरोप से जुड़े मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से उनकी हिरासत का अनुरोध किए जाने के बाद प्रधान को सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
24 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह प्रधान की याचिका पर 24 सितंबर को सुनवाई करेगा. प्रधान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य ने इस मामले का उल्लेख नहीं किया था. कांग्रेस उम्मीदवार के अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और कहा कि प्रधान को गिरफ्तार दिखाकर इस मामले में रिमांड के लिए अदालत में पेश किया गया था.
प्रधान को लगभग दो दशक पहले दर्ज शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक मामले में 21 सितंबर को कांथी अदालत ने 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इससे पहले 19 सितंबर को उन्हें नंदीग्राम में 2007 से जुड़े मामलों में लंबित चार अन्य गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट के संबंध में हल्दिया अनुमंडल कोर्ट ने तीन अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. साल 2007 में पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और खेजुरी थानों में प्रधान के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे. पुलिस के मुताबिक, प्रधान को लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था
