मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है. अब पूर्व आईएएस अफसरों के एक ग्रुप ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. पूर्व आईएएएस और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोमवार (5 अक्टूबर) को ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस जारी किया, जिसमें निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद को लेकर कुमार के खिलाफ छह आरोप लगाए गए हैं.
इस समूह में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता योगेंद्र यादव शामिल है. समूह के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्वाचन आयोग के दफ्तर जाकर नोटिस सौंपने से रोका गया.
निर्वाचन आयोग के मुख्यालय वाले रास्ते पर बैरिकेड
नागरिक अधिकार कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा कि निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक जाने वाली सभी सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए गए थे, जबकि अधिकारियों को पता था कि पूर्व ब्यूरोक्रेट्स का एक प्रतिनिधिमंडल वहां आने वाला है. उन्होंने इन पाबंदियों को कानून और संविधान का उल्लंघन करार दिया.
नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर क्या लगाए गए आरोप
नोटिस में दावा किया गया है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों समेत कई बड़े निर्णय निर्वाचन आयोग के भीतर बिना किसी उचित चर्चा, सलाह-मशविरे या औपचारिक रूप से दर्ज कार्यवाही के लिए गए थे. इसमें उन दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों वाली रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने अपनी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे.
फॉर्म 6 का क्या है मामला
नोटिस में ‘फॉर्म-6’ को लेकर आरोप लगाया गया है कि वैधता पर आंतरिक आपत्तियों के बावजूद इसके बदले हुए संस्करण का इस्तेमाल किया गया. इसमें पहले से पंजीकृत उन मतदाताओं से यह घोषणापत्र लेने की जरूरत पर भी सवाल उठाया गया है, जिनके ‘नाम गलत तरीके से हटा दिए गए थे’ कि वे पहली बार अपना नाम शामिल कराने की कोशिश कर रहे हैं.
नोटिस में आरोप लगाया है कि ईसीआईनेट चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के कानूनी अधिकार को कमजोर किया है; ये अधिकारी मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता सूची में सुधार करने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
इनपुट – पीटीआई
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