भारत की प्रमुख दवा निर्माता कंपनी ल्यूपिन लिमिटेड ने देश में फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे करोड़ों मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. कंपनी ने मंगलवार को भारत में क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के इलाज और बेहतर प्रबंधन के लिए Formoflo-G MDI नाम का एक खास इनहेलर लॉन्च करने की घोषणा की है.
ल्यूपिन का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा फिक्स्ड-डोज ट्रिपल कॉम्बिनेशन मीटर-डोज इनहेलर है, जो तीन अलग-अलग दवाओं के फायदों को एक साथ केवल एक इनहेलर में समेटे हुए है. इस नई थेरेपी को भारत के औषधि नियंत्रक जनरल से भी हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद इसे भारतीय बाजार में आधिकारिक रूप से उतार दिया गया है.
तीन स्थापित दवाएं अब केवल एक ही इनहेलर में
चिकित्सा जगत में अब तक सीओपीडी के गंभीर मरीजों को अपनी सांस की नली को खोलने और सूजन को कम करने के लिए दिन में कई बार अलग-अलग तरह के इनहेलर्स और दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ता था. मरीजों की इसी असुविधा को दूर करने के लिए ल्यूपिन ने एक बड़ा इनोवेटिव कदम उठाया है.
कंपनी द्वारा लॉन्च किए गए Formoflo-G MDI में तीन बेहद असरदार और स्थापित थेरेपीज – ग्लाइकोपाइरोनियम ब्रोमाइड, फॉर्मोटेरोल फ्यूमरेट और फ्लूटिकासोन प्रोपियोनेट को एक निश्चित मात्रा में मिक्स किया गया है. मध्यम से लेकर अत्यधिक गंभीर श्रेणी के सीओपीडी मरीजों के लंबे समय तक चलने वाले इलाज के लिए यह इनहेलर बेहद मददगार साबित होगा.
भारत में 5.5 करोड़ से ज्यादा मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद
सीओपीडी फेफड़ों से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक बीमारी है, जिसमें मरीज की सांस की नलियां ब्लॉक हो जाती हैं और उसे सांस लेने में भारी तकलीफ, सीने में जकड़न और लगातार खांसी की शिकायत रहती है. भारत में यह बीमारी विकलांगता और असमय मौत के सबसे प्रमुख कारणों में से एक बनी हुई है.
ल्यूपिन लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में 5.5 करोड़ से भी अधिक लोग इस फेफड़े की बीमारी के साथ जीने को मजबूर हैं. ऐसे में यह एक अकेला इनहेलर इन करोड़ों मरीजों के दैनिक जीवन को आसान बनाने और उनके इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक क्रांतिकारी उत्पाद साबित हो सकता है.
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कैसे काम करता है यह नया इनहेलर?
यह फिक्स्ड-डोज इनहेलर सीधे फेफड़ों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाकर सांस की नलियों को चौड़ा करने का काम करता है, जिससे हवा का प्रवाह आसान हो जाता है और सांस फूलने की समस्या तुरंत कंट्रोल होती है. साथ ही यह फेफड़ों के भीतर होने वाली सूजन और जलन को भी काफी कम कर देता है.
हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने साफ किया है कि इस इनहेलर का उपयोग केवल डॉक्टर की पर्ची और उनकी सख्त देखरेख में ही नियमित रोकथाम के लिए किया जाना चाहिए, इसे अचानक आने वाले सांस के तीव्र हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं करना है. इसके साथ ही हर बार इनहेलर का डोज लेने के बाद मरीजों को अपने मुंह को पानी से अच्छी तरह साफ करने की सलाह दी जाती है ताकि मुंह के छाले या गले के इन्फेक्शन से बचा जा सके.
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