हिमाचल प्रदेश के शिमला में एनएचएआई के फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत निर्माणाधीन ट्विन टनल को लेकर संजौली, शांतिविहार, भट्टाकुफ़र, ढली और चलौंठी क्षेत्रों के प्रभावित परिवारों में चिंता बनी हुई है. प्रभावितों का कहना है कि टनल निर्माण के चलते कई घरों में दरारें आने लगी हैं और यदि निर्माण इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में सैकड़ों घरों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. प्रभावितों का कहना है कि वे विकास चाहते हैं लेकिन अपने घरों की बलि देकर नहीं.
शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि एनएचएआई की ओर से टनल निर्माण से पहले उन्हें उचित जानकारी नहीं दी गई. उनका कहना है कि निर्माण कार्य के कारण उनके घरों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी हुई है, जबकि अब तक प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा भी नहीं मिला है. प्रभावितों के अनुसार, करीब डेढ़ साल से कई लोगों को अपने घरों से बाहर रहना पड़ रहा है.
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ट्विन टनल संघर्ष समिति का गठन
मामले को लेकर स्थानीय प्रभावित परिवारों और क्षेत्रवासियों ने ट्विन टनल संघर्ष समिति का गठन किया है. समिति की ओर से प्रभावित परिवारों की स्थिति, उनकी मांगों और टनल निर्माण से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लगातार उठाया जा रहा है. प्रभावितों का कहना है कि वे विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर लोगों के घरों और सुरक्षा की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के संगायन में आया मामला
उन्होंने कहा कि इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले पर संज्ञान लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने शिमला में एनएचएआई के इस प्रोजेक्ट का मौके पर निरीक्षण किया. टीम ने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं एवं चिंताएं सुनीं.
उन्होंने बताया कि हाई पावर कमेटी ने प्रभावितों को आश्वासन दिया है कि पूरे मामले पर हाई कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी जाएगी. निरीक्षण के बाद प्रभावित परिवारों को अपने घरों और जान-माल की सुरक्षा तथा समस्याओं के समाधान को लेकर उम्मीद जगी है. समिति अब प्रेस वार्ता के माध्यम से पूरे मामले को मीडिया के सामने रखने जा रही है.
