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कैमोर में एस्बेस्टस कचरे पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, स्थानीय लोगों से मिले


मध्य प्रदेश में कटनी जिले के कैमोर में एस्बेस्टस कचरे का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कैमोर पहुंचे, जहां उन्होंने जहरीले एस्बेस्टस कचरे से प्रभावित होने का दावा कर रहे लोगों से मुलाकात की. स्थानीय लोगों का आरोप है कि एवरेस्ट कंपनी के जहरीले फाइबर कचरे को खेल मैदान में फेंके जाने से इलाके के कई लोग बीमार हुए हैं, जबकि कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है. अब इस मामले को लेकर लोगों ने जिम्मेदारों से जवाब और कार्रवाई की मांग उठाई है.

कैमोर में एस्बेस्टस कचरे की मौजूदगी और उससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य नुकसान को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के प्रभावित लोगों से मिलने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है. स्थानीय लोगों के आरोपों की निष्पक्ष जांच, कचरे के सुरक्षित निस्तारण और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग अहम हो गई है.

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10 लाख टन एस्बेस्टस दूषित कचरा मौजूद 

उमंग सिंगार ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कैमोर में दशकों पुराने एस्बेस्टस कचरे और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर जांच की है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस-दूषित कचरा आज भी अलग-अलग इलाकों में मौजूद है. वहीं, स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होने की बात सामने आई है. 

लंदन से आए मुखर्जी से भी मुलाकात कर उमंग सिंगार से बात की ओर उनके द्वारा बता चला कि फैक्ट्री के करीबन 7 सौ मजदूर ओर उनके परिवार वाले करीबन 8 सौ लोगों चेकअप कराया है, जिसमें सभी कैंसर से पीड़ित है और उनको मुआवजा भी मिला है. उमंग सिंगार ने कहा कि ब्रिटेन की पूर्व औद्योगिक कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल से जुड़े कैमोर के एस्बेस्टस कचरे की कहानी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है.

पांच हजार लोग एस्बेस्टस जनित बीमारियों से पीड़ित 

ब्रिटेन से मीडिया टीम कैमोर पहुंची और शहर के उन इलाकों का जायजा लिया, जहां एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी, धूल और मलबा मौजूद होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक कैमोर के खेल मैदानों, आवासीय इलाकों और खुली जमीन पर एस्बेस्टस के टुकड़े आज भी दिखाई देते हैं. जांच के दौरान टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए श्वसन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया. विदेशी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में 5 हजार से ज्यादा लोग एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं. 

वहीं, पिछले साल आयोजित मेडिकल कैंप में करीब 1200 और लोगों में एस्बेस्टस से संबंधित बीमारी के लक्षण सामने आने की बात कही गई है. विशेषज्ञ डॉक्टर के मुताबिक कैमोर में एस्बेस्टस के संपर्क का असर बेहद गंभीर है. सांस की बीमारी, इलाज का भारी खर्च और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा यहां के लोगों के सामने है. 

खेल के मैदान में सोमेश की बिगड़ी तबियत 

रिपोर्ट में कैमोर के 40 वर्षीय सोमेश की कहानी भी सामने आई है. परिवार का दावा है कि बचपन में खेल मैदान में एस्बेस्टस के संपर्क में आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा. परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे कैमोर छोड़कर कहीं और जा सकें. जांच के दौरान पूर्व फैक्ट्री कर्मचारियों के परिवारों से भी बात की गई. 

आरोप है कि काम के दौरान कर्मचारियों को एस्बेस्टस के खतरे से बचाव के पर्याप्त साधन और जानकारी नहीं दी गई. विदेशी मीडिया ने 1970 के दशक के कंपनी के कुछ आंतरिक दस्तावेज भी सामने रखे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इन दस्तावेजों में कंपनी के एक डॉक्टर ने भारतीय श्रमिकों को एस्बेस्टस के खतरों से बेहतर तरीके से बचाने और उन्हें जोखिम के बारे में जानकारी देने की जरूरत बताई थी.

फैक्ट्री बंद होने के बाद भी बनी है कचरे की समस्या 

टर्नर एंड न्यूऑल का बाद में पतन हुआ, लेकिन कैमोर में छोड़े गए एस्बेस्टस कचरे की समस्या आज भी बनी हुई है. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि इस पुराने औद्योगिक कचरे को हटाने और प्रभावित लोगों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है. रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों ने कैमोर को सुरक्षित बनाने की लागत 100 मिलियन पाउंड से अधिक होने का अनुमान जताया है. 

ब्रिटेन में जारी है कानूनी बहस 

वहीं, कॉरपोरेट जवाबदेही और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर ब्रिटेन में भी कानून और जिम्मेदारी पर बहस जारी है. बताया जा रहा है कि एस्बेस्टस से जुड़ा यह कारोबार बाद में दूसरी कंपनियों के हाथों में गया और अब इससे जुड़ी औद्योगिक संपत्ति सोमानी ग्रुप के पास होने की बात कही जा रही है. हालांकि, कैमोर में मौजूद पुराने कचरे की जिम्मेदारी और उसके निस्तारण को लेकर स्थिति अब भी सवालों के घेरे में है. 

वहीं, 8 अक्टूबर को बैरिस्टर और डॉक्टरों की टीम के कैमोर पहुंचने की बात सामने आई है. माना जा रहा है कि टीम स्थानीय लोगों से मुलाकात कर एस्बेस्टस के स्वास्थ्य और कानूनी पहलुओं को समझेगी. कैमोर की एस्बेस्टस समस्या अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है. ब्रिटेन से आई जांच के बाद यह मामला एक बार फिर पर्यावरण, स्वास्थ्य, मुआवजे और कॉरपोरेट जवाबदेही के बड़े सवाल खड़े कर रहा है.

अधिकारियों का दावा वेस्ट मैटेरियल मिटटी में दबा दिया गया 

इस मामले में कटनी कलेक्टर ने कहा कि कैमूर इलाके में जो पूर्व में जो इस स्थान पर फैक्ट्री थी और उनके वेस्ट मटेरियल जो खेल मैदान में फेंका गया था उसे पहले ही मिट्टी में दबा दिया गया था. यदि इस मामले में दोबारा ऐसी कोई शिकायत आती है तो वह इलाके का निरीक्षण कर कर उसे मटेरियल दबाने के लिए संबंधित विभाग का निर्देश देंगे और यदि कोई इससे बीमार हो रहा है, उसके लिए शिकायत के बाद लोगो का मेडिकल परीक्षण जरूर करा उनका इलाज कराया जाएगा. 

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