Headlines

रिपोर्ट में सब ठीक, फिर क्यों आता है कार्डियक अरेस्ट?


नाना पाटेकर से जुड़ी कार्डियक अरेस्ट की खबर ने एक बार फिर लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट एकदम सामान्य हो, इसके बावजूद अचानक कार्डियक अरेस्ट कैसे आ जाता है.

दरअसल, सामान्य जांच रिपोर्ट किसी व्यक्ति की सेहत की उस समय की स्थिति बताती है. इससे भविष्य में होने वाली हर समस्या का अनुमान लगाना संभव नहीं होता. कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के बीच अंतर समझना भी जरूरी है.

सामान्य रिपोर्ट के बाद भी क्यों हो सकता है कार्डियक अरेस्ट ?

कार्डियक अरेस्ट में दिल की गतिविधि में अचानक गंभीर गड़बड़ी हो जाती है. इससे दिल शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है. कई मामलों में इसकी वजह दिल की धड़कन का खतरनाक तरीके से अनियमित होना होता है. ईसीजी, ब्लड टेस्ट और दूसरे मेडिकल टेस्ट दिल की सेहत के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी देते हैं. लेकिन हर जांच हर तरह की समस्या का पता नहीं लगा सकती. कुछ गड़बड़ियां समय के साथ विकसित होती हैं, जबकि कुछ समस्याएं अचानक सामने आती हैं. इसके अलावा, दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियां, पहले हुआ हार्ट अटैक, दिल की संरचना में बदलाव और कुछ आनुवंशिक स्थितियां भी कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ा सकती हैं. कई बार शुरुआती जांच में कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता. इसलिए केवल एक सामान्य रिपोर्ट के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि दिल से जुड़ा कोई खतरा नहीं है.

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है ?

लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समस्या समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं. हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने वाली किसी धमनी में रुकावट आ जाती है. इससे दिल के एक हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती. सीने में दर्द, दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना और बेचैनी इसके लक्षण हो सकते हैं. जरूरी भी नहीं है की हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे हो.

कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत प्रणाली प्रभावित होती है और दिल प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है. व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर देता है.दोनों स्थितियों का आपस में संबंध भी है. 

यह भी पढ़ें : दिल्ली में कहर बरपा रहा डेंगू-मलेरिया, अब तक इतने लोग बने शिकार

दिल की सेहत के लिए किन बातों का रखें ध्यान ?

सामान्य रिपोर्ट आने के बाद भी सेहत को लेकर लापरवाह नहीं होना चाहिए. नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर नियंत्रण, कोलेस्ट्रॉल की निगरानी, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और धूम्रपान से दूरी दिल की सेहत के लिए जरूरी हैं. अगर परिवार में कम उम्र में अचानक मृत्यु या दिल की गंभीर बीमारी का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें. बार-बार सीने में दर्द, असामान्य धड़कन, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें. जरूरत के अनुसार डॉक्टर अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर मदद मिलना बेहद अहम होता है. यदि कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस न ले, तो तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाएं और सीपीआर शुरू करें. सामान्य रिपोर्ट राहत दे सकती है, लेकिन वह भविष्य में हर तरह की बीमारी से सुरक्षा की गारंटी नहीं होती.

यह भी पढ़ें : देश में आधे से ज्यादा लोगों की थाली में प्रोटीन की कमी, रिपोर्ट में खुलासा

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *