दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधाएं मजबूत करने के लिए लोक नायक अस्पताल (LNJP) में नई अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सेवा संकल्प अभियान के तहत ड्यूल-स्लाइस सीटी सोर्स 256 CT स्कैनर और तीन हाईटेक टेस्ला एमआरआई मशीनों का उद्घाटन किया. ये उपकरण इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत उपलब्ध कराए हैं.
स्ट्रोक से कैंसर तक, बीमारी की पहचान में मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि, लगभग 40 करोड़ की कीमत वाली इन नई मशीनों से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में विश्वस्तरीय जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी. इनका इस्तेमाल आपातकालीन चिकित्सा के साथ हृदय रोग, कैंसर, मूत्र रोग, तंत्रिका संबंधी बीमारियों, हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं तथा बाल रोगों की जांच में किया जा सकेगा. इन आधुनिक उपकरणों की मदद से स्ट्रोक, कैंसर, लिवर और प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारियों का समय पर और अधिक सटीक पता लगाने में सहायता मिलेगी. जिससे मरीजों का सही समय पर उचित उपचार मिलने में मदद मिल सकेगी.
माताओं और नवजात शिशुओं के लिए भी बढ़ीं सुविधाएं
इस दौरान मुख्यमंत्री ने LNJP अस्पताल में नई मशीनों के अलावा पूर्व में शुरू की गई स्वास्थ्य सुविधाओं का जिक्र करते हुए बताया कि, माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए स्तनपान प्रबंधन इकाई स्थापित की गई है. यह इकाई मिल्क बैंक के रूप में काम करती है, जिससे जरूरतमंद शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराने में मदद मिलती है.
आगे उन्होंने बताया कि, अस्पताल में न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (NAT) मशीन भी स्थापित की गई है. इसके जरिए HIV और हेपेटाइटिस की जांच करीब 48 घंटे में पूरी की जा सकती है. यह तकनीक रक्त की जांच को अधिक प्रभावी बनाने के साथ रक्तदान और रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया में सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायक है. साथ ही उन्होंने दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अस्पताल में रेयर डिजीज वार्ड के भी विकसित किए जाने की जानकारी दी.
‘अनमोल योजना’ के तहत 56 विकारों की जांच
मुख्यमंत्री ने नवजात शिशुओं में गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान के लिए शुरू की गई ‘अनमोल योजना’ का भी उल्लेख किया. इस योजना के तहत जन्म के तुरंत बाद लिए गए रक्त की एक बूंद से कुल 56 विकारों की जांच की जाती है. इसमें संभावित आनुवंशिक विकारों की पहचान भी शामिल है. इस जांच का मकसद बीमारी के शुरुआती संकेतों को समय रहते पकड़ना है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चे का उपचार जल्द शुरू किया जा सके. शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से नवजात शिशुओं को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाने में मदद मिल सकती है.
सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक पर जोर
रेखा गुप्ता ने कहा कि, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में न केवल दिल्ली बल्कि देश भर के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. जिसे देखते हुए सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी या किसी अन्य परेशानी के कारण किसी नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहना पड़े. इसके लिए सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने, स्वास्थ्य ढांचे को बेहतर बनाने और जांच सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
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