रणजी ट्रॉफी के मैदान पर इस बार कुछ अलग देखने को मिल रहा है. भारतीय घरेलू क्रिकेट में आमतौर पर भारतीय अंपायर ही मैच संभालते हैं, लेकिन इस बार ऑस्ट्रेलियाई अंपायर भी मैदान पर फैसले सुनाते नजर आ रहे हैं. इसे देखकर फैंस के मन में सवाल है कि आखिर बीसीसीआई ने ऐसा क्यों किया. दरअसल, इसके पीछे भारत और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट बोर्डों की खास पहल है.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू किया है. इसके अनुसार दोनों देशों के अंपायर एक-दूसरे के घरेलू टूर्नामेंट में अंपायरिंग करेंगे. इसका मकसद अंपायरों को अलग-अलग मैदानों और हालातों में काम करने का अनुभव देना है.
कौन हैं बेन ट्रेलोर
ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर को घरेलू क्रिकेट में अंपायरिंग का अच्छा अनुभव है. वो 30 फर्स्ट क्लास मैचों, 20 लिस्ट मुकाबलों और बिग बैश लीग के 39 मैचों में अंपायरिंग कर चुके हैं. इसके अलावा, वो 2 महिला वनडे इंटरनेशनल और 4 महिला टी20 इंटरनेशनल मैचों में भी अंपायर रह चुके हैं.
ट्रेलोर क्रिकेट न्यू साउथ वेल्स में अंपायर एजुकेशन ऑफिसर के तौर पर काम करते हैं. वो नए अंपायरों को सिखाने में भी मदद करते हैं. उनके योगदान के लिए उन्हें जॉर्ज बोरविक मेमोरियल अवॉर्ड से 4 बार सम्मानित किया जा चुका है.
रणजी ट्रॉफी में कितने मैचों में करेंगे अंपायरिंग
बेन ट्रेलोर भारत में 2 रणजी ट्रॉफी मैचों में अंपायरिंग करेंगे. पहला मुकाबला दिल्ली और गुजरात के बीच 18 से 21 अक्टूबर तक दिल्ली में खेला जा रहा है. इसके बाद वो 26 से 29 अक्टूबर तक मुंबई और हरियाणा के बीच मुंबई में होने वाले मैच में अंपायरिंग करेंगे.
ऑस्ट्रेलिया जाएंगे भारतीय अंपायर
इस कार्यक्रम के तहत भारतीय अंपायर पराशर जोशी ऑस्ट्रेलिया में 3 मुकाबलों में अंपायरिंग करेंगे. इनमें 2 शेफील्ड शील्ड मैच और 1 वनडे कप मुकाबला शामिल है. वो 11 से 14 नवंबर तक ब्रिस्बेन में, 16 नवंबर को वनडे कप में और 22 से 25 नवंबर तक सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर अंपायरिंग करेंगे.
भारत और ऑस्ट्रेलिया में पिचों और खेल की हालातों में फर्क होता है. ऐसे में दूसरे देश में अंपायरिंग करने से अधिकारियों को नए अनुभव मिलेंगे. इससे उनके फैसले लेने की क्षमता और मैच संभालने के हुनर को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.
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