तमिलनाडु में 1998 के कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए पांच लोगों को 60 दिन की पैरोल दिए जाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार के इस फैसले का सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगी समर्थन कर रहे हैं.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार पर आतंकवादी हमलों के दोषियों के प्रति चुनिंदा नरमी बरतने का आरोप लगाया है. अधिकारियों के अनुसार, पैरोल देने के पीछे निजी कारण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और दोषियों का 25 से 30 साल तक जेल में रहना प्रमुख आधार हैं. हालांकि, भाजपा का कहना है कि ये कारण अपराध की गंभीरता के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं.
पांच दोषियों को मिली 60 दिन की पैरोल
तमिलनाडु सरकार ने मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अजम और नवाब खान को 60 दिन के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी है. इन पांचों को 1998 में कोयंबटूर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराया गया था.
इन धमाकों में 58 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए थे. धमाके भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली से पहले हुए थे. आडवाणी उस समय कोयंबटूर में एक जनसभा को संबोधित करने वाले थे.
भाजपा ने फैसले पर उठाए सवाल
तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता नारायण तिरुपति ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर TVK सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि निजी कारण किसी आतंकवादी हमले की गंभीरता को कम नहीं कर सकते. यह हमला राज्य के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है.
सामूहिक हत्या की थी सुनियोजित कार्रवाई
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा ने चुनावी रैली से पहले धमाकों को अंजाम दिया था. उनके मुताबिक, यह आम नागरिकों को निशाना बनाकर की गई सामूहिक हत्या की सुनियोजित कार्रवाई थी. तिरुपति ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस अपराध को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों को जमानत देने से इनकार किया था.
भाजपा नेता वनथी श्रीनिवासन ने भी पैरोल के फैसले की निंदा की. उन्होंने TVK सरकार से सवाल किया कि किन कारणों और किसकी सलाह पर पांचों दोषियों को पैरोल दी गई. उन्होंने कहा कि कानून मंत्री को इस फैसले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. उनके अनुसार, इस तरह के निर्णयों से कानून के शासन में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है और राज्य में शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है.
VCK ने मुख्यमंत्री विजय को दिया धन्यवाद
दूसरी ओर, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के नेता और सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु ने दोषियों को पैरोल देने के फैसले का स्वागत किया और मुख्यमंत्री विजय का आभार जताया.
उन्होंने कहा कि VCK लंबे समय से 22 मुस्लिम कैदियों की रिहाई की मांग कर रही है, जो लंबे समय से जेल में बंद हैं. छह जून को पार्टी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात कर इन 22 कैदियों को रिहा करने की मांग रखी थी.
वन्नी अरसु के मुताबिक, VCK के लगातार प्रयासों के बाद तमिलनाडु सरकार ने पहले चरण में पांच मुस्लिम उम्रकैद के दोषियों को नियमों के तहत 60 दिन की पैरोल देने का आदेश जारी किया है. उन्होंने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री और कानून मंत्री को धन्यवाद दिया. TVK के विधायक मुस्तफा ने भी पैरोल देने के निर्णय का समर्थन किया.
फरवरी 1998 में हुए थे 12 धमाके
कोयंबटूर में फरवरी 1998 में कुल 12 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों को लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली के दौरान उनकी हत्या की कथित रूप से समन्वित साजिश से जोड़कर देखा गया था. इस मामले में 22 लोगों को दोषी ठहराया गया था, जिनमें से पांच को अब 60 दिन की पैरोल दी गई है.
इससे पहले जनवरी 2023 में भी इसी मामले में दोषी ठहराए गए नौ लोगों को अंतरिम रूप से जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई थी.
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