राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी और डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमबीबीएस डॉक्टर बने गुरसिमरत सिंह ढिल्लों का मानना था कि पंजाब और देश को अच्छे आईपीएस अधिकारी की जरूरत है. इसी मजबूत इरादे और दूर दृष्टि के साथ उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा का पद हासिल किया. हाल ही में उनके मामा और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी गुरिंदर सिंह ढिल्लों की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनकी यह सफलता की कहानी एक बार फिर चर्चा में आ गई.

पंजाब के पटियाला के रहने वाले डॉक्टर गुरसिमरत सिंह ढिल्लों 2025 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उनका जन्म और पालन पोषण पटियाला में ही हुआ. वहीं उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा आवर लेडी ऑफ फातिमा कान्वेंट सेकेंडरी स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की और एक क्वालिफाइड डॉक्टर बने.

डॉक्टर गुरसिमरत सिंह ढिल्लों के माता-पिता दोनों पेशे से डॉक्टर हैं. हालांकि उनके मामा गुरिंदर सिंह ढिल्लों पंजाब पुलिस में अपर पुलिस महानिदेशक के पद से रिटायर्ड पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं. मामा की वर्दी और समाज सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने डॉक्टर बनने के बाद सिविल सेवा का रास्ता चुना.

गुरसिमरत सिंह ढिल्लों ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2021 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की. इसके बाद उन्हें डीएएनआईपीएस कैडर मिला, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर काम किया.

लगातार दिल्ली में पदस्थ रहने और दूसरे सेवा में चयन होने के बावजूद उनका अंतिम टारगेट भारतीय पुलिस सेवा में जाना था. ऐसे में यूपीएससी में एक बार सफलता पाने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी. इसके बाद उन्होंने फिर यूपीएससी की परीक्षाएं दी और आईआरएस जैसी प्रतिष्ठित सेवा में चयनित हुए.

वहीं लगातार प्रयास और चौथे प्रयास में फिर से उन्होंने सफलता हासिल की. इसके बाद आखिरकार वह आईपीएस अधिकारी बनें. उन्हें 2025 बैच में पंजाब कैडर आवंटित हुआ था. वहीं गुरसिमरत सिंह ढिल्लों का कहना है कि उन्हें लगता है कि देश और खासकर पंजाब को ईमानदार और अच्छे आईपीएस अधिकारियों की जरूरत है. उनकी यहीं सोच उन्हें डॉक्टर और एसीपी बनने के बाद भी आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी.
Published at : 26 Oct 2026 04:36 PM (IST)
