दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज में सोमवार (26 अक्टूबर) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो की वैज्ञानिक डॉ. नंदिनी हरिनाथ ने अगस्त्य स्पेस सेंटर का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने From Human Space Flight to Deep Space: A World of Challenges विषय पर स्पेशल लेक्चर दिया. साथ ही, स्टूडेंट्स को मानव अंतरिक्ष उड़ान से लेकर डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन तक की चुनौतियों के बारे में बताया.
बता दें कि डॉ. नंदिनी हरिनाथ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं और उन्हें ‘रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है. इस वक्त वह इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC), बेंगलुरु की डिप्टी-डायरेक्टर हैं.
अंतरिक्ष अभियानों की चुनौतियों पर हुई चर्चा
अपने लेक्चर व्याख्यान में डॉ. हरिनाथ ने मानव अंतरिक्ष उड़ान और गहन अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी वैज्ञानिक एवं तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अभियानों की सफलता के लिए वैज्ञानिक नवाचार, अत्याधुनिक तकनीक, सटीक योजना और विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है. उन्होंने स्टूडेंट्स को अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में मौजूद नई संभावनाओं से परिचित कराया. साथ ही, वैज्ञानिक जिज्ञासा, इनोवेशन और रिसर्च के प्रति छात्रों को प्रोत्साहित किया.
विद्यार्थियों के लिए शुरू हुआ अगस्त्य स्पेस सेंटर
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण अगस्त्य स्पेस सेंटर का उद्घाटन रहा. इस केंद्र का उद्देश्य विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और रिसर्च एवं इनोवेशन से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है.
शिवराज 350 रिसर्च मैग्जीन का पहला अंक जारी
कार्यक्रम में शिवाजी कॉलेज की बहुविषयक अकादमिक रिसर्च मैग्जीन शिवराज 350 के पहले अंक का विमोचन भी किया गया. साथ ही, पत्रिका की आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की गई. कॉलेज के अनुसार, शिवराज 350 का मकसद विभिन्न अकादमिक विषयों के बीच शोध सहयोग को मजबूत करना और गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों के प्रकाशन के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराना है.
छात्रों ने पूछे अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े सवाल
स्पेशल लेक्चर के बाद पैनल चर्चा और इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किया गया. इसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों ने डॉ. नंदिनी हरिनाथ से मानव अंतरिक्ष उड़ान, डीप स्पेस मिशन, तकनीकी चुनौतियों और भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े सवाल पूछे. इससे छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को समझने के साथ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को जानने का अवसर मिला.
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