- इजरायली चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन बहुमत से पीछे रहा।
- अरब पार्टियां 18-19 सीटों के साथ किंगमेकर बनकर उभरीं।
- सरकार बनाने के लिए उनके समर्थन की आवश्यकता होगी।
- यह समर्थन तय करेगा कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा।
Israel Elections 2026: संसदीय चुनावों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित है. शुरुआती अनुमानों के मुताबिक नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 54 सीटें मिल सकती हैं. यह 120 सदस्यों वाली नेसेट में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से कम है.
पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट से जुड़े विपक्षी गठबंधन को लगभग 48 सीटें मिलने का अनुमान है. अब दलों को 18 से 19 सीटें मिलने का अनुमान है. उनका समर्थन यह तय कर सकता है कि कौन सा पक्ष सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटा पाएगा. इसी स्थिति की वजह से उन्हें इजरायली राजनीति का किंग मेकर कहा जा रहा है.
इजरायल के अरब नागरिक कौन हैं?
अरब नागरिक या फिर इजरायली अरब शब्द उन फिलिस्तीनी मूल के लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो 1948 में इजरायल राज्य की स्थापना और उसके बाद हुए अरब इजरायल युद्ध के दौरान इजरायल की सीमाओं के अंदर ही रह गए थे. जो फिलिस्तीनी विस्थापित हो गए थे उनके उलट इस समुदाय के लोग देश में ही रहे और उनके पास इजरायल की नागरिकता है.
इस नागरिकता में वोट देने का अधिकार भी शामिल है. यह समुदाय इजरायल की कुल आबादी का लगभग 21% से 22% है. यह लगभग 20 लाख लोगों के बराबर है. इनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं जबकि ईसाई और ड्रूज अल्पसंख्यक भी इस समुदाय का हिस्सा हैं.
चुनाव में उनकी भागीदारी देश की राजनीतिक व्यवस्था में उनकी एक बड़ी उपस्थिति दर्ज कराती है. हालांकि सरकार बनाने में उनका प्रभाव तब और भी जरूरी हो जाता है जब बड़े राजनीतिक गुट अकेले या फिर अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार चलाने के लिए जरूरी सीटों को हासिल नहीं कर पाते.
कैसे बने ये किंगमेकर?
इजरायल की नेसेट मैं 120 सीटे हैं और बहुमत हासिल करने के लिए किसी पार्टी या फिर गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है. शुरुआती अनुमान बताते हैं कि यहूदी नेतृत्व वाले दो मुख्य राजनीतिक गुटों में से कोई भी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है. ऐसा अनुमान है कि नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गुट को 54 सीटें मिल सकती हैं. इसी के साथ गादी से जुड़े विपक्षी गुट को लगभग 48 सीटें मिलने की उम्मीद है.
ऐसी स्थिति में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है. जॉइंट लिस्ट और राआम जैसी पार्टियों को कुल मिलाकर लगभग 19 सीटें मिलने का अनुमान है. इस वजह से अगली सरकार बनाने की बातचीत में उनका समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है.
चुनाव के नतीजे सिर्फ इस बात से नहीं मापे पर जा सकते कि अरब पार्टियों ने कितनी सीटें जीती हैं. यह नेसेट के गणित का भी सवाल है. जब किसी भी बड़े गुट के पास बहुमत नहीं होता तो एक छोटा राजनीतिक समूह भी मूल भाव करने की काफी ताकत हासिल कर सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके समर्थन से कोई एक पक्ष 61 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंच सकता है.

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सरकार बनाने में आखिरी फैसला
इन अनुमानों के चलते नेतन्याहू और विपक्ष दोनों को ही अपने मौजूदा गुटों से बाहर के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. अरब पार्टियों का रुख इस बात को तय कर सकता है कि किस गठबंधन को सरकार चलाने के लिए पर्याप्त समर्थन मिलता है और इजरायल का अगला प्रधानमंत्री कौन बनता है.
18 से 19 सीटों का अनुमान, साफ बहुमत का अभाव और मंसूर अब्बास का बातचीत करने का तरीका इन सबने अरब पार्टियों को चुनाव के बाद की प्रक्रिया के केंद्र में ला खड़ा किया है. उन्हें किंग मेकर इस वजह से कहा जाता है क्योंकि उनके पास सबसे बड़ा गुट नहीं है बल्कि इस वजह से कि उनका समर्थन इस बात को तय कर सकता है कि कौन सा पक्ष सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत तक पहुंचता है.
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