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अरनब तूफान से आंध्र प्रदेश में कितना नुकसान, CM चंद्रबाबू नायडू ने दी जानकारी


आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार (29 अक्टूबर, 2026) को अरनब तूफान से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. उन्होंने तूफान से क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण किया और किसानों को हिम्मत बंधाई. उन्होंने पुनर्वास केंद्रों में रह रहे प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं भी सुनीं.

उन्होंने कहा कि पहले से की गई सावधानियों के कारण चक्रवात अरनब से होने वाली जनहानि को कम करने में मदद मिली. हालांकि, एहतियाती कदम उठाए जाने के बावजूद सात लोगों की जान चली गई.

तूफान से राज्य को करीब 4,600 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान- नायडू

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को कोनसीमा जिले के मुम्मिडिवरम विधानसभा क्षेत्र के गच्चकायालपोर गांव में मीडिया कॉन्फ्रेंस कर सरकार की ओर से चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने कहा, ‘तूफान प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए केंद्र सरकार की टीमें शुक्रवार को आंध्र प्रदेश पहुंचेंगी. शुरुआती आकलन के अनुसार, अरनब तूफान के कारण राज्य को लगभग 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. विस्तृत आकलन के बाद नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘अरनब तूफान से राज्य को हुए नुकसान के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की गई है. हमने राज्य की मौजूदा स्थिति और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी केंद्र सरकार को दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि शुक्रवार को केंद्रीय टीम आंध्र प्रदेश भेजी जाएगी.’

किसानों और प्रभावित लोगों को सरकार देगी मदद- नायडू 

चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘तूफान से हुए शुरुआती नुकसान की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई है. प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पर ही वास्तविक स्थिति का पता चलता है. इसी वजह से मैं जमीनी स्तर पर हालात का जायजा लेने पहुंचा हूं. नारियल के प्रत्येक पेड़ के लिए 1,500 रुपये और ऑयल पाम के प्रत्येक पेड़ के लिए भी 1,500 रुपये की सहायता दी जाएगी. पुनर्वास केंद्रों से घर लौटने वाले प्रत्येक प्रभावित परिवार को 25 किलो चावल, आवश्यक वस्तुओं का एक पैकेट और खर्च के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी.’ 

उन्होंने कहा, ‘किसानों की फसलों का पहले से बीमा कराया गया है. अगर फसल की पैदावार कम होती है, तो उन्हें बीमा के तहत मुआवजा मिलेगा. सरकार किसानों को नुकसान से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी. कृषि और बागवानी फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजे की राशि जल्द किसानों के खातों में जमा की जाएगी.’

हमने पहले भी कई तूफानों का किया सामना- नायडू

सीएम नायडू ने कहा, ‘हमने पहले भी कई तूफानों का सामना किया है. करीब 30 साल पहले, 6 नवंबर को आए हरीकेन नामक भीषण तूफान ने इसी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी. हुदहुद, तितली, मोंथा और अरनब जैसे तूफानों ने राज्य को नुकसान पहुंचाया है. करीब 70 साल पहले दिविसीमा में आए तूफान के दौरान हजारों लोग लापता हो गए थे. पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए सरकार ने पहले से एहतियाती कदम उठाए, जिससे जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सका.’

उन्होंने कहा, ‘तूफानों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनके प्रभाव को जनता पर कम से कम पड़ने देने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया है. प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रभावी ढंग से काम करने पर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है. तमाम सावधानियों के बावजूद दुर्भाग्यवश सात लोगों की मौत हो गई.’

सरकार ने समय-समय पर अधिकारियों को किया सतर्क- नायडू

आंध्र प्रदेश के सीएम ने कहा, ‘सरकार ने समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्क किया. जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया. अरनब तूफान से कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. परसों रात से ही गिरे हुए पेड़ों को हटाने का काम लगातार किया जा रहा है. श्रीकाकुलम से लेकर कृष्णा जिले तक स्थिति की निगरानी की गई. विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के माध्यम से लगातार समीक्षा की गई.’

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग यह कहकर मजाक उड़ाते हैं कि तूफान नहीं आ रहे हैं और सरकार बेवजह अत्यधिक सावधानी बरत रही है. जनता को परेशानी से बचाने के लिए किए जा रहे राहत कार्यों पर भी कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. मैंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि जनता के लिए काम करते समय ऐसी टिप्पणियों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. लोगों को परेशानी से बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है. दूरसंचार सेवाओं को भी बहाल किया जा रहा है.’

कोनसीमा में करीब 8000 बिजली के खंभे गिरे- CM नायडू

चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘कोनसीमा जिले में लगभग 8,000 बिजली के खंभे गिर गए हैं. सभी क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों को दोबारा स्थापित कर जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी. बिजली बहाली के लिए तेलंगाना सरकार से बात कर 1,000 कर्मचारियों को भेजने का अनुरोध किया गया है. जरूरत पड़ने पर कर्नाटक और तमिलनाडु से भी कर्मचारियों को बुलाया जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘तकनीक के इस्तेमाल से तालाबों के तटबंध टूटने की घटनाओं को रोकने में मदद मिली है. जिन स्थानों पर पेड़ गिरने की आशंका थी, वहां मशीनें भेजकर तत्काल उन्हें हटाने के कदम उठाए गए. राज्य पहले से ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है. ऐसे तूफान राज्य की आर्थिक स्थिति पर और दबाव डालते हैं. केंद्र सरकार राज्य को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है. केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन शुरू किया था, लेकिन पिछली सरकार इसका समुचित उपयोग नहीं कर पाई. हमारी सरकार हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाएगी.’

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