दीपावली के मौके पर हर घर में डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, घी, पनीर, मावा और मिठाइयों का इस्तेमाल होता है. ऐसे में तमाम मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं. ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में वह खाने पीने के इन सामानों में मिलावट कर लोगों की सेहत और जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं. त्योहार के सीजन में मिलावटखोरों की कलई खोलने के लिए राजस्थान सरकार ने अनूठी पहल करते हुए मोबाइल लैब की शुरुआत की है.
यह मोबाइल लैब हाईटेक मशीनों के जरिए तैयार की गई है और इसमें स्पॉट पर ही सैंपल के रिजल्ट देखने की सुविधा है. राजस्थान सरकार इसे राजधानी जयपुर के अलग-अलग इलाकों में भेजेगी. कोई भी व्यक्ति खाने-पीने के किन्हीं भी सामानों का मुफ्त परीक्षण करा सकता है. इसके लिए लोगों को कोई फीस नहीं देनी होगी.
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कुछ ही घंटों में मोबाइल पर मिलेगी लैब रिपोर्ट
इस हाईटेक मोबाइल लैब में दही और जैसी खाद्य सामग्रियों के सैंपल के नतीजे कुछ ही सेकंड में लोगों को दे दिए जाएंगे, जबकि पनीर मावा और मिठाइयों के रिजल्ट कुछ घंटे में लोगों के मोबाइल फोन पर भेज दिए जाएंगे. राजस्थान के डेयरी मंत्रालय ने विभाग के मंत्री जोराराम कुमावत के निर्देश पर पहली बार इस तरह की मोबाइल लैब की सुविधा की शुरुआत की है.
फ्री में करवा सकते हैं परीक्षण
मोबाइल लैब के इंचार्ज डॉ० हरिराम के मुताबिक, यह मोबाइल लैब जयपुर के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में जाएगी. मोबाइल लैब किस वक्त किस इलाके में रहेगी, इसकी सूचना पहले ही लोगों को दे दी जाएगी. जो भी व्यक्ति त्योहार के मौके पर खाने पीने के किसी भी सामान की खरीदारी कर रहे हैं, वह उनके सैंपल लाकर यहां मुफ्त में उनका परीक्षण करा सकते हैं. लैब की रिपोर्ट उन्हें तुरंत दे दी जाएगी. लैब की रिपोर्ट के आधार पर वह दुकानदार के साथ ही फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट से भी शिकायत की जा सकती है. संबंधित विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई करेगा.
यह मोबाइल लैब सरस डेयरी की तरफ से तैयार की गई है. इस मोबाइल लैब का इस्तेमाल बाद में सहकारिता के आधार पर चलने वाली उत्तर भारत की सबसे बड़ी सरस डेयरी के प्रोडक्ट्स की क्वालिटी परखने में किया जाएगा. दीपावली के मौके पर मोबाइल लैब की शुरुआत को मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने के मामले में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
सरस डेयरी के एमडी मनीष फौजदार के मुताबिक इस मोबाइल लैब की शुरुआत के बाद मिलावटखोरों में डर पैदा होगा और वह ऐसा करने से बचेंगे. इससे आम लोगों की सेहत को खतरे की संभावना कम हो जाएगी.
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