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PM मोदी की तारीफ वाले बयान पर संजय राउत बोले- क्या वो मेरे व्यक्तिगत दुश्मन?


शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ किए जाने को लेकर उठने वाले सवालों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, “मोदी मेरे व्यक्तिगत दुश्मन हैं क्या? राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया था, वह मुझे अच्छा लगा था. उस समय टेलीप्रॉम्प्टर नहीं था और उनका भाषण राजनीतिक भी नहीं था, बल्कि उत्स्फूर्त था. इसलिए मैंने उनके भाषण की तारीफ की थी.”

दरअसल शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘बोध कीर्तन’ का विमोचन समारोह मुंबई के दादर स्थित ब्राह्मण सहायक संघ के सभागृह में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पीएम मोदी की तारीफ को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब संजय राउत ने जवाब देते हुए उक्त बातें कही है.

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संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में केवल दूसरे तरह के उत्सव ही नहीं, बल्कि किताबों और साहित्य के उत्सव भी होने चाहिए. ऐसे कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी यह साबित करती है कि मराठी साहित्य की अलग-अलग विधाओं को पढ़ने और समझने वाले लोग आज भी मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि किताबों से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है और लोगों को इनमें हिस्सा लेना चाहिए.

हर दिन रात 10 बजे करता हूं कीर्तन- संजय राउत

संजय राउत ने अपने आध्यात्मिक पक्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि क्या संजय राउत आध्यात्मिक नहीं हो सकते? वह हर दिन रात 10 बजे कीर्तन करते हैं. एक अच्छा वक्ता एक अच्छा कीर्तनकार भी हो सकता है.

जेल में बिताए 105 दिनों का संजय राउत ने किया जिक्र

उन्होंने अपनी किताब के लेखन के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि वह लगातार पढ़ते रहते हैं और पढ़ी हुई चीजों के नोट्स भी बनाते हैं. जेल में बिताए 105 दिनों के दौरान उनके पास काफी समय था. उस दौरान उन्होंने कई चीजों को करीब से देखा और महसूस किया कि उन अनुभवों पर लिखा जाना चाहिए. उन्होंने विजय माल्या का उदाहरण देते हुए कहा कि जेल में घूमते समय उनके मन में विजय माल्या पर लिखने का विचार आया था.

राउत ने कहा कि मीडिया ने जेल में बिताए उनके दिनों से जुड़ी कई बातों के बजाय विजय माल्या से जुड़ी कहानी को ज्यादा महत्व दिया. उन्होंने देश की मौजूदा स्थिति पर एक कविता की पंक्तियां भी सुनाईं- “सब कुछ है अपने पास, देश में रोटी नहीं तो क्या हुआ, वादा लपेट लो, लंगोट नहीं तो क्या.”

उन्होंने कहा कि ये पंक्तियां आज के देश की स्थिति को दर्शाती हैं. हमारे पास सब कुछ है, चाणक्य भी हैं, लेकिन नकली भी हैं. लोगों के पास रोटी नहीं होने के बावजूद वे परिस्थितियों को सहन कर रहे हैं. इस कार्यक्रम में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की मौजूदगी पर राउत ने कहा कि दोनों यहां राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि पुस्तक प्रेमी के रूप में आए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी दूसरी किताब जल्द ही पाठकों के सामने आएगी.

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