Women in Management: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की एक नई रिपोर्ट में वर्किंग महिलाओं की स्थिति को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. विमेन इन बिजनेस एंड मैनेजमेंट- स्केलिंग सक्सेस नाम से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में मैनेजरियल पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से भी कम है. इस मुकाबले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 34 देश और अर्थव्यवस्था में 3 वें स्थान पर हैं. इस लिस्ट में भारत केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश से आगे हैं. वहीं यह रिपोर्ट देश के कॉर्पोरेट जगत में लैंगिक समानता, सैलरी में अंतर और प्रबंधन के अलग-अलग स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी की तस्वीर दिखाती है. इसके अलावा आपको बता दें कि यह रिपोर्ट 99 देखों के 11,957 उद्यमों पर किए गए आईएलओ के सर्वे पर आधारित है.
मैनेजमेंट में पिछड़ रहा भारत
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हर पांच में से एक यानी लगभग 20 प्रतिशत महिलाएं मैनेजर है. जबकि वैश्विक आंकड़ा 30.5 प्रतिशत है. भारत में कुल मैनेजर पदों के साथ-साथ सीनियर और मिडिल मैनेजमेंट दोनों ही स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है. सेंटर फॉर विमेंस डेवलपमेंट स्टडीज की प्रोफेसर नीथा एन. के अनुसार इस अंतर के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण है. जिसमें पहला महिलाओं की क्षमताओं को लेकर समाज में मौजूद रूढ़िवादिता है, जिसके चलते उन्हें ऊंचे पदों के लिए योग्य नहीं माना जाता है और दूसरा घर-परिवार और बच्चों की देखभाल की भारी जिम्मेदारी है, जिसके कारण महिलाओं को खुद ही इन पदों से पीछे हटना पड़ता है.
सैलरी के अंतर में भारत की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिला कर्मचारियों को पुरुषों की तुलना में प्रति घंटे लगभग 28 प्रतिशत कम सैलरी मिलती है. 23 एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं में यह चौथा सबसे बड़ा जेंडर वेज गैप है. भारत से आगे इस मामले में केवल टोंगा लगभग 64 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया लगभग 41 प्रतिशत और वानुअतु लगभग 29 प्रतिशत है. हालांकि एक पॉजिटिव पहलू यह भी सामने आया है कि मैनेजर के स्तर पर भारत में महिला-पुरुष सैलरी का अंतर लगभग जीरो है. यानी ऊंचे पदों पर पहुंचने के बाद पुरुषों और महिलाओं की कमाई में बड़ा फर्क नहीं दिखाई देता है.
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शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी
रिपोर्ट में शिक्षा के क्षेत्र में भी महिलाओं की हिस्सेदारी पर बात की गई है. भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली कुल महिलाओं में से 23.1 प्रतिशत ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों की पढ़ाई की है, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 31.4 प्रतिशत है. वहीं अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि वेतन और पदों में मौजूद इस अंतर को केवल शिक्षा या काम के घंटे के आधार पर नहीं समझा जा सकता. बल्कि इसके लिए कई तरह की समस्याएं भी जिम्मेदार है, जैसे बिजनेस का जेंडर विभाजन, महिलाओं के काम का कम आकलन और देखभाल से जुड़ी पारिवारिक जिम्मेदारियां इसमें बड़ी समस्याएं हैं.
महिला नेतृत्व वाले बिजनेस दे रहे अच्छे रिजल्ट
इस रिपोर्ट के पॉजिटिव पहलुओं को देखें तो यह सामने आया है कि जिन कंपनियों या बिजनेस की कमान महिलाओं के हाथ में होती है, उनकी व्यावसायिक प्रदर्शन में सुधार देखा गया है. जिन बिजनेस का नेतृत्व महिला सीईओ करती है, उनमें पुरुष सीईओ वाले बिजनेस की तुलना में बेहतर बिजनेस आउटकम्स मिलने की संभावना 6.4 प्रतिशत ज्यादा होती है. वहीं जिन कंपनियों के बोर्ड की चेयरपर्सन महिलाएं हैं, उनमें बेहतर रिजल्ट की संभावना 17.5 प्रतिशत ज्यादा आंकी गई है.
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