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School Bullying Signs: स्कूलों में बुलिंग और साइबर बुलिंग कैसे पहचानें, किन सिग्नल से मदद मांगते हैं बच्चे?


School Bullying Signs: आज के डिजिटल दौर में बच्चों की दुनिया जितनी खुली नजर आती है, उतनी ही जटिल भी हो चुकी है. स्कूलों में होने वाली पारंपरिक बुलिंग यानी मारपीट या मानसिक प्रताड़ना अब केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए साइबर बुलिंग का रूप ले चुकी है.

यूनेस्को और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट्स बताती हैं कि बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे किसी न किसी स्तर पर इस प्रताड़ना का शिकार होते हैं. कई बार बच्चें डर या शर्म की वजह से खुलकर अपनी परेशानी माता-पिता या शिक्षकों को नहीं बता पाते हैं. ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि हम उन बारीक शारीरिक और मानसिक बदलावों को समझें, जिनके जरिए बच्चे अनजाने में मदद की गुहार लगा रहे होते हैं.

पारंपरिक बुलिंग के लक्षण

जब बच्चा स्कूल में शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न का सामना करता है, तो उसके दैनिक जीवन में स्पष्ट बदलाव दिखाई देने लगते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे पहला लक्षण स्कूल रिफ्यूजल बिहेवियर यानी स्कूल जाने से लगातार कतराना या सुबह पेट दर्द और सिरदर्द का बहाना बनाना होता है. यदि बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे, परिवार के सदस्यों से दूरी बना ले या उसकी किताबों, कपड़ों और कीमती सामानों का बार-बार खो जाना या फटना शुरू हो जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.

इसके अलावा, बिना किसी ठोस वजह के अचानक पढ़ाई में ग्रेड्स का गिर जाना, एकाग्रता की कमी, भूख न लगना या रात में डरावने सपने आना भी इस बात का साफ इशारा हैं कि बच्चा स्कूल के माहौल में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है.

साइबर बुलिंग के संकेत

डिजिटल माध्यमों पर होने वाला उत्पीड़न चौबीसों घंटे जारी रह सकता है, जिसकी वजह से इसका शिकार बच्चा मानसिक रूप से अधिक टूट जाता है. साइबर बुलिंग को पहचानने के लिए आपको बच्चे के गैजेट्स के इस्तेमाल के तरीके पर ध्यान देना होगा. अगर बच्चा स्मार्टफोन पर कोई मैसेज या नोटिफिकेशन आने के बाद अचानक सहम जाता है, गुस्सा हो जाता है या स्क्रीन को आपसे छिपाने की कोशिश करता है, तो यह पहला बड़ा अलार्म है.

इसके साथ ही, कंप्यूटर या फोन का उपयोग करते-करते अचानक डिवाइस को बंद कर देना, सोशल मीडिया अकाउंट्स को बिना बताए डिलीट कर देना या उन ऑनलाइन गेम्स को अचानक छोड़ देना जिन्हें वह पहले बहुत पसंद करता था, साइबर बुलिंग का पुख्ता संकेत हो सकते हैं. ऑनलाइन प्रताड़ना झेल रहे बच्चे अक्सर खुद को कमरे में बंद कर लेते हैं और इंटरनेट सर्फिंग के बाद नके चेदरे पर उदासी साफ देखी जा सकती है.

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मदद के लिए बच्चों के गुप्त संकेत

अक्सर देखा गया है कि बच्चे सीधे तौर पर यह नहीं कहते कि उन्हें परेशान किया जा रहा है, बल्कि वे अप्रत्यक्ष रूप से मदद की मांग करते हैं. उदाहरण के लिए, बच्चा अचानक आपसे पूछ सकता है कि अगर सोशल मीडिया पर कोई किसी को परेशान करे तो क्या करना चाहिए या वह स्कूल बस के बजाय खुद छोड़ने जाने की जिद कर सकता है. बार-बार दोस्तों में अचानक बड़े बदलाव आना या किसी खास दोस्त का नाम लेने से कतराना भी उनके डर को दर्शाता है.

NCERT और यूनेस्को द्वारा जारी विशेष सुरक्षा मार्गदर्शिका में यह सलाह दी गई है कि माता-पिता को ऐसे समय में बिना किसी फैसले पर पहुंचे बच्चों को एक सुरक्षित और सहानुभूतिपूर्ण माहौल देना चाहिए, ताकि वे बिना किसी डर के अपनी बात कह सकें.

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