आज के समय में बढ़ती उम्र के साथ लोग अपनी जमा पूंजी को ऐसी जगह रखना चाहते हैं, जहां उनका पैसा सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर नियमित आमदनी भी मिलती रहे. अगर आप भी पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में पैसा जमा करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. कर्नाटक में एक बुजुर्ग महिला ने पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटिजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) और सेविंग्स अकाउंट खुलवाने के लिए 1,00,500 रुपए जमा किए थे.
इसके बदले उन्हें पोस्टमास्टर ने हस्ताक्षर और मुहर लगी दो रसीदें भी दीं, लेकिन न तो खाते से जुड़े दस्तावेज मिले और न ही जमा रकम का कोई हिसाब. बाद में पता चला कि संबंधित पोस्टमास्टर कथित तौर पर पैसे लेकर फरार हो गया है. इस मामले में गडग जिला उपभोक्ता आयोग ने डाक विभाग को महिला की जमा रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है. इसके अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए भी अलग से मुआवजा देने को कहा गया है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 14 नवंबर 2023 का है. ललिता नाम की महिला ने कर्नाटक के कोडिकोप्पा ब्रांच पोस्ट ऑफिस में SCSS अकाउंट खुलवाने के लिए एक लाख रुपये और सेविंग्स बैंक अकाउंट के लिए 500 रुपये जमा किए थे. पोस्टमास्टर ने उन्हें दोनों रकम की रसीद दी, लेकिन SCSS सर्टिफिकेट और सेविंग्स अकाउंट की पासबुक जारी नहीं की. बार-बार मांगने के बाद भी जब दस्तावेज नहीं मिले, तो महिला ने डाक विभाग में शिकायत की.
डाक विभाग ने रकम जमा रकम पर उठाए सवाल
डाक विभाग ने महिला के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास तय SB-26(T) रसीद नहीं थी और विभाग के रिकॉर्ड में भी जमा रकम की एंट्री नहीं मिली. हालांकि, महिला ने आयोग के सामने पोस्टमास्टर के हस्ताक्षर और मुहर वाली दोनों नकद रसीदें पेश कीं.
आयोग ने डाक विभाग को क्यों ठहराया जिम्मेदार?
आयोग ने पाया कि दोनों रसीदों पर पोस्टमास्टर के हस्ताक्षर और मुहर मौजूद थे. इसलिए सिर्फ तय फॉर्मेट की रसीद नहीं होने के आधार पर महिला के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता. आयोग का कहना था कि जमा रकम का हिसाब रखना और जरूरी दस्तावेज जारी करना संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी थी. यही वजह है कि आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना.
29 अक्टूबर 2026 को दिए गए आदेश में आयोग ने डाक अधिकारियों को 1,00,500 रुपये 7 नवंबर 2024 से पेमेंट होने तक 6% सालाना ब्याज के साथ लौटाने को कहा है. इसके अलावा महिला को मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 5,000 रुपये देने होंगे. इस तरह ब्याज को छोड़कर कुल 1,15,500 रुपये का पेमेंट करना होगा. साथ ही आयोग ने आदेश दिया है कि यह रकम आठ हफ्ते के भीतर दी जाए.
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