ऑपरेशन सिंदूर में भारत से पिटा पाकिस्तान अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है. पाकिस्तान की नौसेना ने स्वदेशी ‘तैमूर’ एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण से पाकिस्तान की समुद्री हमला करने की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले 16 अप्रैल को भी उसने एक स्वदेशी एंटी-शिप मिसाइल का परीक्षण किया था.
‘तैमूर’ एक एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम है. इसे खासतौर पर जहाज से लॉन्च करने के लिए बनाया गया है. ये मिसाइल जमीन और समुद्र दोनों पर करीब 600 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम है. पाकिस्तान को हमेशा डर सताता रहता है कि अगर भारत के साथ सैन्य टकराव हुआ तो अरब सागर के किनारे बसे कराची या ग्वादर को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा. इसी मिशन में जुटे आसिम मुनीर ने 600 किलोमीटर की दूरी तक मार सकने वाली मिसाइल तैयार कर ली है. पाकिस्तान दिखाना चाहता है कि अगर इस इलाके में संघर्ष होता है तो वो टकराव खतरनाक हो सकता है.
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कितनी खतरनाक है तैमूर?
तैमूर एक स्वदेशी, कम दृश्यता वाली हवा से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल है, जिसे पाकिस्तान के NESCOM और ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस के तहत डेवलेप किया गया है. इसे Ra’ad और Ra’ad II मिसाइलों का अपग्रेडेशन माना जा रहा है. हालांकि इसे समुद्री हमलों के लिए अभियान के लिए तैयार किया गया है. पाकिस्तान का कहना है कि यह हथियार 600 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है, जिससे प्रक्षेपण करने वाले विमान कई नौसैनिक वायु रक्षा प्रणालियों की मारक क्षमता से काफी बाहर रह सकते हैं यानी पाकिस्तान के एयरस्पेस से कोई लड़ाकू विमान उत्तरी अरब सागर में किसी एयरक्राफ्ट कैरियर या फिर शिप को टारगेट कर सकता है.
कितनी है तैमूर की स्पीड?
डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल में 400 से 450KG हाई एक्सप्लोसिव वारहेड लगा हुआ है, जिससे ये मिसाइल विध्वंसक जहाजों, फ्रिगेट जहाजों, जहाजों और रसद सहायता जहाजों को तबाह कर सकती है. तैमूर एक टर्बोजेट इंजन के जरिए इस्तेमाल की जाएगी, इसकी स्पीड करीब मैक 0.8 की है, जिससे यह सबसोनिक हो जाता है, लेकिन अगर यह रडार क्षितिज से नीचे रहता है तो इसे रोकना अभी भी मुश्किल है.
INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत का कुछ बिगाड़ पाएगी तैमूर?
रिपोर्ट के अनुसार, इसकी उड़ान प्रोफ़ाइल इसे 152 मीटर जितनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की अनुमति देती है, जबकि मिसाइल लक्ष्य क्षेत्र की ओर उतरने से पहले पारगमन के दौरान अधिक ऊंचाई पर भी काम कर सकती है. पाकिस्तान ने तैमूर को खासकर आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत को टारगेट में रखते हुए डेवलेप किया है, जोकि विध्वंसक और फ्रिगेट जहाजों के काफिलों के साथ चलते हैं. ये जहाज आने वाले क्रूज मिसाइल खतरों से बचाव के लिए लंबी दूरी के सेंसर और बराक-8 जैसी बहुस्तरीय रक्षात्मक मिसाइलों पर काफी हद तक निर्भर करते हैं, जिसका ये तैमूर मिसाइल कुछ नहीं बिगाड़ सकती है.
