- पप्पू यादव के बयान पर पोर्न देखने वाले नेताओं पर हुई चर्चा।
- वैश्विक स्तर पर अमेरिका सबसे ज्यादा पोर्न देखता है।
- भारत शीर्ष 10 देशों में 9वें स्थान पर है।
- सरकारी प्रतिबंधों से ऑनलाइन खपत का तरीका बदला।
Adult Video Consumption: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे पूरे देश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है. महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कुछ विवादित टिप्पणियां की. उन्होंने कहा कि देश के लगभग 75% नेता पोर्न देखते हैं. उनकी इस टिप्पणी ने पूरे देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी. इसी बीच आइए जानते हैं कि दुनिया में असल में सबसे ज्यादा पोर्न किस देश में देखी जाती है और भारत इस मामले में कहां खड़ा है?
वैश्विक खपत में संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे आगे
वैश्विक पोर्न खपत की रैंकिंग में संयुक्त राज्य अमेरिका का दबदबा लगातार बना हुआ है. 2025-26 के आंकड़ों से ऐसा पता चलता है कि व्यस्क वेबसाइट पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक इसी देश से आता है. इसका मुख्य कारण वहां इंटरनेट की पहुंच का काफी ज्यादा होना, कम प्रतिबंध और डिजिटल पहुंच का व्यापक विस्तार है. इन्हीं वजहों से अमेरिका वैश्विक दर्शकों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है.
भारत की रैंकिंग
भारत अभी शीर्ष 10 देशों में शामिल है. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक वह लगभग 9वें स्थान पर है. हालांकि पिछले सालों की तुलना में यह एक गिरावट है. 2018 और 2019 के बीच भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर था. इससे पता चलता है कि ऐतिहासिक रूप से उसका उपयोगकर्ता आधार कितना बड़ा रहा है.
सरकारी प्रतिबंध और उनका प्रभाव
भारत की रैंकिंग में गिरावट की मुख्य वजह सख्त डिजिटल नियम हैं. 2018 से सरकार ने 800 से ज्यादा व्यस्क वेबसाइटों तक पहुंच को ब्लॉक कर दिया है. हालांकि इससे सीधे ट्रैफिक में कमी आई है लेकिन इससे खपत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. बल्कि यह बस दूसरे प्लेटफार्म और तरीकों पर शिफ्ट हो गई है.
वैश्विक स्तर पर टॉप 5 देश
संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा इंडोनेशिया, ब्राजील, फ्रांस और फिलिपींस जैसे देश भी शीर्ष उपभोक्ताओं में शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कुछ देशों में प्रतिबंध लागू हैं फिर भी वीपीएन का इस्तेमाल करके और पहुंच के दूसरे तरीकों की वजह से वह उच्च रैंकिंग पर बने हुए हैं.
इंटरनेट के विकास और पहुंच की भूमिका
शीर्ष रैंकिंग में भारत की लगातार मौजूदगी का श्रेय उसके विशाल इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार को जाता है. किफायती डेटा, स्मार्टफोन का व्यापक इस्तेमाल और डिजिटल जुड़ाव में हो रही वृद्धि इस बात को पक्का करती है कि सभी श्रेणियों में ऑनलाइन सामग्री की खपत उच्च बनी रहे.
प्रतिबंधों के बावजूद खपत जारी
प्रतिबंध लागू होने के बावजूद रिपोर्ट से ऐसा पता चलता है कि उपयोगकर्ता सोशल मीडिया, मिरर साइट और वीपीएन सेवाओं के जरिए ऐसी सामग्री तक पहुंच बनाते हैं. इससे यह पता चलता है कि नीतिगत उपाय पहुंच के तरीकों को तो बदल सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि वे मांग को भी खत्म कर दें.
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