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West Bengal Election: बंगाल चुनाव पर अशोक गहलोत का बड़ा बयान, ‘अगर BJP जीतती है तो यह उसकी…’


पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार कर जयपुर लौटे कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच क्लोज फाइट है. चुनाव में कुछ भी हो सकता है. बीजेपी इस चुनाव को एक युद्ध की तरह लड़ी है. काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी थी. अगर बंगाल में बीजेपी जीतती है, तो यह उसकी नहीं बल्कि चुनाव आयोग की जीत होगी. 

उन्होंने आगे कहा, ”बंगाल में नतीजों के बारे में कोई भी कयास लगा पाना मुश्किल है. बीजेपी ने केंद्र की पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह और राजस्थान में हमारी सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचा था. बंगाल में अगर बीजेपी जीतती है तो वह उसके हथकंडों और चुनाव आयोग की जीत होगी. यह चुनाव आयोग के लिए भी इम्तिहान है. बंगाल में बख्तरबंद गाड़ियां चर्चा का सबब बनी हुई है.” 

राजस्थान BJP प्रभारी ने सचिन पायलट पर कर दिया बड़ा दावा, अशोक गहलोत बोले- उम्मीद करता हूं अब छोड़ के…

सचिन पायलट अब पूरी तरह से कांग्रेस के साथ हैं- गहलोत

राजस्थान के पूर्व सीएम ने कांग्रेस महासचिव और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को लेकर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि सचिन पायलट अब पूरी तरह से कांग्रेस के साथ हैं. उन्होंने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि अब वह कभी कांग्रेस छोड़ने के बारे में नहीं सोचेंगे. उन्हें इस बात का अंदाजा लग गया होगा कि कांग्रेस से दूर होने का अंजाम क्या होता है. वो अब इस बात को समझ भी चुके हैं और संभल भी गए हैं. सचिन पायलट की दोनों टांगें अब कांग्रेस में हैं और आगे भी रहेंगी. बीजेपी ने पहले गुमराह करने का काम किया था.”

‘धमकी देने वाले लोग क्यों पकड़े नहीं जा रहे’

उन्होंने राजस्थान विधानसभा को धमकी दिए जाने के सवाल पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, ”राजस्थान विधानसभा को पंद्रह दिनों में तीसरी बार धमकी दिया जाना मेरी समझ से परे है. यह सरकार के लिए चिंता की बात होनी चाहिए. सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए कि अब तक धमकी देने वाले लोग क्यों पकड़े नहीं जा रहे हैं.”

AAP के 7 सांसदों के बीजेपी में जाने पर क्या बोले गहलोत?

राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के बीजेपी में विलय के सवाल पर अशोक गहलोत ने एक बार फिर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उपसभापति को इस बारे में नियमों के मुताबिक ही फैसला लेना चाहिए. विपक्ष के एतराज को भी सुनना चाहिए. हमने भी दो बार बीएसपी के विधायकों का विलय अपनी पार्टी में कराया था लेकिन हर बार नियमों और औपचारिकताओं का पालन कराया गया था.

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