देहरादून स्थित उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी सियासी रणनीति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया. नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई चर्चा के दौरान सरकार ने न केवल अपने पक्ष को मजबूती से रखा, बल्कि विपक्ष को विशेषकर घेरने में भी सफलता हासिल की.
सदन में महिला आरक्षण के प्रावधानों को विस्तार से रखा
सदन में मुख्यमंत्री धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताते हुए इसके प्रावधानों को विस्तार से रखा. उन्होंने कहा कि यह कानून देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाएगा. उनके मुताबिक, लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण को लागू करना समय की मांग है और इससे शासन में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी.
बहस के दौरान सीएम ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के रुख पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का रुख महिलाओं के हितों के खिलाफ है और यह उनकी दोहरी राजनीति को दर्शाता है. इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह रहा कि विधानसभा में कांग्रेस इस मुद्दे पर वॉकआउट नहीं कर पाई. आमतौर पर विपक्ष वॉकआउट के जरिए अपनी असहमति दर्ज कराता है, लेकिन इस बार सरकार की रणनीति ने उसे ऐसा करने का अवसर ही नहीं दिया.
स्थिति तब और दिलचस्प हो गई जब सरकार ने कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी में ही उनके ‘नकारात्मक रुख’ की निंदा का प्रस्ताव सदन में पेश कर पारित करा दिया. इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल दिया और राजनीतिक रूप से सरकार को बढ़त दिलाई. सत्ता पक्ष ने भी इसे अपनी रणनीतिक जीत के रूप में पेश किया.
कांग्रेस इस मुद्दे पर वॉकआउट करने में रही असफल
सत्र में केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ही नहीं हुए, बल्कि एक ठोस प्रस्ताव भी सामने आया. उत्तराखंड विधानसभा ने केंद्र सरकार से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण जल्द लागू करने का औपचारिक अनुरोध किया. इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जहां अन्य राज्यों में कांग्रेस इस मुद्दे पर वॉकआउट कर अपना संदेश देने में सफल रही, वहीं उत्तराखंड में वह सरकार की रणनीति में उलझ गई. निंदा प्रस्ताव पारित होने के दौरान उसकी मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को सत्ता पक्ष के पक्ष में मोड़ दिया.
सरकार ने विपक्ष को घेर की राजनीतिक बढ़त हासिल
कुल मिलाकर, इस विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आक्रामक और संतुलित राजनीति का संयोजन दिखाया. उन्होंने एक ओर विपक्ष को घेरते हुए राजनीतिक बढ़त हासिल की, तो दूसरी ओर महिलाओं के मुद्दे पर ठोस प्रस्ताव लाकर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की. यह सत्र न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भी याद किया जाएगा.
