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किरदार बदले, लेकिन कहानी वही, जब बड़े पर्दे पर ‘जुड़वां’ निकलीं दो अलग-अलग फिल्में


90 के दशक में ऐसा हुआ था, जब सिनेमाघरों में एक ही महीने में ऐसी दो फिल्में रिलीज की गईं, जिनकी कहानी एक जैसी थी, लेकिन किरदार अलग थे. हम बात कर रहे हैं 1990 के दशक में जुलाई के महीने में रिलीज हुई फिल्मों ‘जुर्म’ और ‘हार जीत’ की. दोनों फिल्मों की कहानी एक थी, लेकिन किरदार अलग थे और हैरान कर देने वाली बात ये रही कि दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया.

क्या है फिल्म ‘जुर्म’ की कहानी?
पहले बात करते हैं जुर्म की. ये फिल्म 13 जुलाई, 1990 को रिलीज हुई थी. इसमें विनोद खन्ना ने इंस्पेक्टर शेखर वर्मा का किरदार निभाया है. वो अपनी पत्नी (मीनाक्षी शेषाद्रि) से बहुत प्यार करता है, लेकिन एक केस के दौरान गवाह बनी संगीता बिजलानी की मदद करते-करते उससे प्यार करने लगता है. फिल्म में शादी के बाद के रिश्ते को गलती के रूप में दिखाया गया है. आखिर में काफी भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बाद वो फिर से अपनी पत्नी का भरोसा और प्यार जीत लेता है. इस फिल्म का निर्देशन महेश भट्ट ने किया था. 

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‘हार जीत’ की स्टोरी भी सेम
जुलाई के महीने में ही दो हफ्ते बाद यानी 27 जुलाई को फिल्म ‘हार जीत’ रिलीज हुई. इस फिल्म का नाम और किरदार अलग हैं, लेकिन कहानी काफी हद तक मिलती-जुलती है. इसमें कबीर बेदी, माधवी और फराह नाज़ को एक लव ट्राएंगल में दिखाया गया है. कहानी में कबीर बेदी का किरदार शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे रिश्ते में पड़ जाता है. फिल्म दो रिश्तों के बीच के भावनात्मक संघर्ष को सरल तरीके से दिखाती है. 

किरदार बदले, लेकिन कहानी वही, जब बड़े पर्दे पर 'जुड़वां' निकलीं दो अलग-अलग फिल्में

दर्शकों का मिला खूब प्यार
गौर करने वाली बात ये है कि ये दोनों ही फिल्में अंग्रेजी फिल्म ‘समवन टू वॉच ओवर मी’ की कहानी से प्रेरित है. हालांकि, एक जैसी कहानी होने के बाद भी दोनों की फिल्मों का दर्शकों का प्यार मिला.

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