महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार, 1 मई को महाराष्ट्र के नागरिकों से मराठी भाषा के प्रति ‘मुखर’ होने का आह्वान किया. इसी के साथ उन्होंने अफसोस व्यक्त करते हुए दावा किया कि लोगों को इस उद्देश्य के लिए एकजुट होने से रोकने के लिए ‘जानबूझकर प्रयास’ किए जा रहे हैं.
राज ठाकरे ने वसंत व्याख्यानमाला द्वारा आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि मराठी को ‘अभिजात’ भाषा का दर्जा प्राप्त है, फिर भी ‘हम हिंदी को लेकर विवादों में उलझे हुए हैं.’ ठाकरे ने कहा कि मराठी भाषी व्यक्ति जितना अनभिज्ञ और भयभीत कोई नहीं होता.
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सचिन तेंदुलकर का भी किया जिक्र
राज ठाकरे ने दावा किया, “जब तक आप (लोग) मराठी भाषा के प्रति मुखर नहीं होंगे, तब तक यह स्थिति बनी रहेगी. मुझे गर्व होता है जब सचिन तेंदुलकर वानखेड़े स्टेडियम में आकर मराठी में भाषण देते हैं. वहीं दूसरी ओर, हम कवि, लेखक, साहित्यकार का मूल्यांकन उनकी जाति के आधार पर करते हैं. हमें (मराठी भाषी लोगों को) एकजुट होने से रोकने का जानबूझकर प्रयास किया गया है.”
मनसे प्रमुख ने कहा कि महाराष्ट्र की बिगड़ती स्थिति के लिए सभी नेता और सरकार जिम्मेदार हैं. ठाकरे ने पूछा, ‘‘ऑटो रिक्शा चालकों को मराठी में बोलने से इनकार करने की हिम्मत कहां से मिलती है? क्या वे तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल में ऐसा करने की हिम्मत करेंगे?’’
‘महान नेताओं को जाति के आधार पर विभाजित करना गलत’
राज ठाकरे इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्रवासियों को छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर के स्मारकों को गर्व से दिखाना चाहिए और कहा कि यह दुखद है कि महान नेताओं को जाति के आधार पर विभाजित कर दिया गया.
राज ठाकरे ने की शरद पवार की तारीफ
उन्होंने कहा, “बालासाहेब ठाकरे दुनिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सभी हिंदुओं को हिंदू के रूप में मतदान करने के लिए एकत्रित किया. शरद पवार से मेरे कई मुद्दों पर वैचारिक मतभेद हैं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ी क्रांति का नेतृत्व किया.”
राज ठाकरे ने अपने भाषण का समापन यह कहते हुए किया कि महाराष्ट्र के लोगों को केवल मराठी में ही बात करनी चाहिए, जिससे अंततः अन्य लोग भी इसी भाषा में बात करने के लिए बाध्य होंगे. उन्होंने कहा, ‘‘आप जहां भी जाएं, केवल मराठी में ही बात करें.’’
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