- बोरीवली राष्ट्रीय उद्यान में टिकट दरें बढ़ाने पर रोक लगी.
- नागरिकों के भारी विरोध के कारण फैसला स्थगित हुआ.
- नई दरों के निर्धारण तक पुरानी दरों से शुल्क लिया जाएगा.
- डिजिटल टिकटिंग प्रणाली हेतु व्हाट्सएप चैटबॉट जल्द लॉन्च होगा.
मुंबई के बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) में टिकट की दरों में बढ़ोतरी के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. यह दरें 1 मई (शनिवार) से लागू होने वाली थीं, लेकिन नागरिकों के भारी विरोध के बाद इसपर रोक लगा दी गई है. इसको लेकर पार्क प्रबंधन ने एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें कहा है कि प्रशासनिक एवं तकनीकी कारणों से नई दरों पर रोक लगाई जा रही है. इसके साथ ही, पर्यटक सेवाओं की संशोधित दरें जल्द ही निर्धारित करने की मांग की गई है. इसमें कहा गया है कि जब तक नई दरों तय नहीं होती तब तक पुरानी दरों के आधार पर ही पर्यटक सेवाओं का शुल्क लिया जाएगा.
ज्ञापन में कहा गया है कि, ‘प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से, उक्त दर वृद्धि को स्थगित किया जा रहा है. साथ ही, पर्यटक सेवाओं के लिए संशोधित दरें जल्द ही तय की जाएंगी। जब तक संशोधित दरें तय नहीं हो जातीं, तब तक पर्यटक सेवाओं के लिए पहले से स्वीकृत दरों पर ही शुल्क लिया जाना चाहिए.” एक वन अधिकारी ने शुक्रवार (1 मई) को बताया कि मई के अंत तक इस मामले में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है.
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शुल्क बढ़ोतरी के फैसले पर क्यों लगी रोक?
SGNP के उप निदेशक (दक्षिण) किरण पाटिल ने बताया कि कीमतों में संशोधन का फैसला फिलहाल रोक दिया गया है. जल्द ही डिजिटल टिकटिंग प्रणाली भी शुरू की जाएगी जिसके लिए एक WhatsApp चैटबॉट लॉन्च किया जाएगा. गौर हो कि अचानक SGNP पार्क के शुल्क वृद्धी के फैसले का लोगों ने काफी विरोध किया और इसे बेतुका बताया था. मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोगों ने इस के बदलाव को सुबह सैर करने वालों के साथ अन्याय करार दिया था. लोगों का तर्क था कि पार्क की कई बुनियादी सुविधाओं का खर्च CSR फंड से उठाया आता है, ऐसे में इतनी कीमतें क्यों वसूली जा रही हैं. बढ़ते विरोध को देखते हुए शुल्क वृद्धी के फैसले को फिलहाल के लिए रोक लगा दी गई है.
क्या है मामला?
गौर हो कि इसी प्राधिकरण की ओर से 21 अप्रैल को एक ज्ञापन के जरिए 1 मई से पार्क के टिकट की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी. घोषणा में मॉर्निंग वॉकर्स के लिए वार्षिक शुल्क को 383 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया था. वहीं, वरिष्ठ नागरिकों को पास के लिए सालाना 5,000 रुपये का भुगतान करने की बात कही गई थी. मासिक पास के लिए नागरिकों के लिए 1,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 500 रुपये कर दिया गया था.
इसके अलावा सफारी, मिनी ट्रेन, नौका विहार और ई-बस जैसी सेवाओं के शुल्क भी बढ़ा दिए गए थे. बढ़़ाए गए शुल्क पर प्रशासन का तर्क था कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या, सुविधाओं के रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में सुधार के लिए इसे बढ़ाया गया था.
