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मराठी भाषा विवाद पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई की प्रतिक्रिया, जानें पूर्व सांसद ने क्या कहा?


महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सहित एक साथ कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी है. हुसैन दलवाई ने महाराष्ट्र सरकार से टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के नियम की जाँच का अभियान शुरू करने को कहा है.

TMC ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें राज्य कर्मचारियों को वोटों की गिनती की निगरानी के काम से बाहर रखने का विरोध किया गया है. इस पर उन्होंने कहा कि पहले ऐसा कभी नहीं होता था, चुनाव जब भी होता था तो राज्य के अधिकारी ही उसकी निगरानी करते थे. कांग्रेस नेता ने पश्चिम बंगाल केंद्रीय अधिकारियों की नियुक्ति पर कहा कि, उन्हें ऐसा लगाता है कि सरकार का इरादा घपला करने का है.

15 बूथों पर री-पोलिंग को बताया सही

वहीं दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम में 11 बूथों और डायमंड हार्बर में 4 बूथों पर रीपोलिंग (पुनः मतदान) को उन्होंने सही ठहराया है. उन्होंने कहा कि कैप्चरिंग हुई तो पुनः मतदान होना चाहिए. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि कैप्चरिंग तो केंद्र सरकार के जरिये ही हो रही है.

चुनाव आयोग पर कांग्रेस नेता ने लगाया घपलेबाजी का आरोप

पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने पश्चिम बंगाल चुनाव में गड़बड़ी की बात कहते हुए चुनाव आयोग पर घपलेबाजी का आरोप लगाया है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के स्ट्रांग रूम की निगरानी किए जाने पर पूर्व सांसद ने प्रतिक्रिया दी है.

नमाज मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बताया सही

सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा खारिज किए जाने के फैसले पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि, सार्वजनिक जगहों पर हर वक्त नमाज पढ़ते होंगे तो यह गलत है. उन्होंने अपने बयान में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है.

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने और परिवहन मंत्री के बयान, मराठी न आने पर लाइसेंस कैंसिल हो जाने पर कहा कि, लाइसेंस देते मराठी आती है या नहीं, इसकी जांच की गई होगी. उसके बाद ही लाइसेंस दिया गया है. उन्होंने लाइसेंस कैंसिलेसन पर भी सवाल उठाए हैं. 

उन्होंने अपने बयान में कहा है कि, मुंबई में मराठी भाषा के लोग ज्यादा रहते हैं और उन्हें हिंदी नहीं आती है, ऐसे में लाइसेंस देते वक्त यह देखना चाहिए था कि मराठी आती या नहीं. टैक्सी और ऑटो ड्राइवर को इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह पैसेंजर्स को मराठी भाषा में जवाब दे सके. इसके साथ ही उन्होंने मराठी पढ़ने और लिखने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए हैं. कहा कि, मराठी परिवारों में इंग्लिश बोली जाती हैं और मराठी स्कूल बंद की जा रही हैं, उन पर कोई बोल नहीं रहा है.



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