Aaj Ka Panchang: 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि है. दिल्ली में प्रदोष पूजा शाम 5:59 से रात 8:27 बजे तक करें. शिवरात्रि की निशिता पूजा रात 11:44 बजे शुरू होगी. आज त्रयोदशी श्राद्ध भी है, जिसके लिए दिन का समय अलग रखा गया है.
आज के पंचांग में सबसे जरूरी बात पूजा का सही क्रम है. दिन में पितरों का श्राद्ध, शाम को प्रदोष पूजा और देर रात शिवरात्रि की आराधना होगी. रात 10:15 बजे त्रयोदशी समाप्त होने के बाद चतुर्दशी शुरू होगी. इसी तिथि परिवर्तन से समझ आता है कि दोनों शिव व्रत एक ही दिन क्यों हैं.
आज का पंचांग एक नजर में
- वार- गुरुवार
- पूर्णिमांत मास- आश्विन
- अमांत मास- भाद्रपद
- पक्ष- कृष्ण पक्ष
- तिथि- त्रयोदशी रात 10:15 बजे तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र- पूर्वा फाल्गुनी रात 9:20 बजे तक, फिर उत्तरा फाल्गुनी
- योग- शुक्ल, 9 अक्टूबर की रात 12:58 बजे तक, फिर ब्रह्म
- करण- गर सुबह 10:43 बजे तक, फिर वणिज रात 10:15 बजे तक, उसके बाद विष्टि
- चंद्र राशि- सिंह, 9 अक्टूबर की सुबह 3:18 बजे तक, फिर कन्या
- सूर्य राशि- कन्या
- सूर्योदय- सुबह 6:18 बजे
- सूर्यास्त- शाम 5:59 बजे
तिथि, नक्षत्र, योग और करण के परिवर्तन Hindu Panchang में दिए गए समय के अनुसार हैं. दिल्ली के मासिक पंचांग में सूर्योदय सुबह 6:18 और सूर्यास्त शाम 5:59 बजे दर्ज है.
प्रदोष और शिवरात्रि आज ही क्यों हैं?
प्रदोष व्रत के लिए शाम के प्रदोष काल में त्रयोदशी देखी जाती है. आज सूर्यास्त के समय त्रयोदशी रहेगी. गुरुवार होने के कारण यह गुरु प्रदोष है. दिल्ली में प्रदोष पूजा का समय शाम 5:59 से रात 8:27 बजे तक है. पूजा के लिए चतुर्दशी शुरू होने का इंतजार न करें.
मासिक शिवरात्रि का निर्णय रात के निशिता काल में कृष्ण चतुर्दशी के आधार पर होता है. आज रात 10:15 बजे चतुर्दशी शुरू हो जाएगी और निशिता पूजा के दौरान रहेगी. इसलिए शिवरात्रि भी 8 अक्टूबर को है. चतुर्दशी 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे समाप्त होगी.
शिवरात्रि की पूजा में तारीख का भ्रम न रखें
निशिता पूजा 8 अक्टूबर की रात 11:44 बजे से 9 अक्टूबर की रात 12:33 बजे तक है. यहां 9 अक्टूबर लिखा होने का मतलब अगली रात नहीं है. पूजा आज रात शुरू होकर आधी रात के बाद समाप्त होगी.
प्रदोष की शाम वाली पूजा और शिवरात्रि की निशिता पूजा के लिए सामग्री पहले तैयार रख सकते हैं. जल, बेलपत्र और दीपक के साथ अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें. दोनों व्रत साथ होने से अपनी ओर से उपवास या पारण का नया नियम न बनाएं.
किस तिथि वाले पितरों का श्राद्ध आज करें?
जिन परिजनों का निधन शुक्ल या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर हुआ था, उनके लिए आज त्रयोदशी श्राद्ध है. इसे तेरस श्राद्ध भी कहते हैं. श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल का महत्व है.
उपलब्ध श्राद्ध समय विवरण में कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:32 बजे, रौहिण दोपहर 12:32 से 1:19 बजे और अपराह्न काल दोपहर 1:19 से 3:39 बजे तक दिया गया है. त्रयोदशी रात तक रहने का मतलब श्राद्ध रात में करना नहीं है.
राहुकाल और श्राद्ध का समय टकराए तो?
दिल्ली की दैनिक गणना में राहुकाल दोपहर 1:36 से 3:03 बजे तक है. यह अपराह्न श्राद्ध काल के भीतर आता है. समय के इस टकराव से बचकर व्यवस्था करनी हो तो कुतुप या रौहिण का पहले वाला समय रखा जा सकता है. अपराह्न में अनुष्ठान तय है तो पुरोहित से श्राद्ध के निर्धारित नियम के अनुसार समय तय कराएं. केवल राहुकाल देखकर श्राद्ध की तिथि न बदलें.
आज दिन में कब बदलेगा पंचांग?
सुबह 10:43 बजे: गर करण समाप्त, वणिज शुरू.
रात 9:20 बजे: पूर्वा फाल्गुनी के बाद उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र.
रात 10:15 बजे: त्रयोदशी समाप्त, चतुर्दशी और विष्टि करण शुरू.
9 अक्टूबर, रात 12:58 बजे: शुक्ल योग के बाद ब्रह्म योग.
9 अक्टूबर, सुबह 3:18 बजे: चंद्रमा सिंह से कन्या राशि में प्रवेश करेगा.
आज की 3 जरूरी बातें
- त्रयोदशी श्राद्ध दिन में करें.
- प्रदोष पूजा शाम में है; चतुर्दशी का इंतजार जरूरी नहीं.
- शिवरात्रि की निशिता पूजा आज देर रात होगी, कल की रात नहीं.
FAQ
8 अक्टूबर 2026 को कौन सी तिथि है?
कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात 10:15 बजे तक है. इसके बाद चतुर्दशी शुरू होगी.
गुरु प्रदोष की पूजा का समय क्या है?
दिल्ली में 8 अक्टूबर को प्रदोष पूजा शाम 5:59 से रात 8:27 बजे तक है.
मासिक शिवरात्रि की पूजा कब करें?
दिल्ली-NCR में निशिता पूजा 8 अक्टूबर की रात 11:44 से 9 अक्टूबर की रात 12:33 बजे तक है. यह 8 अक्टूबर की देर रात का समय है.
प्रदोष और शिवरात्रि एक ही दिन क्यों हैं?
शाम के प्रदोष काल में त्रयोदशी और देर रात निशिता काल में चतुर्दशी रहने से दोनों व्रत एक ही दिन हैं.
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