पिछले साल जम्मू के किश्तवाड़ में मचेल माता यात्रा के दौरान हुए भीषण प्राकृतिक हादसे से सबक लेते हुए, प्रशासन इस बार आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर बेहद सतर्क है. 3 जुलाई से शुरू होने वाली इस पवित्र यात्रा में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं.
किसी भी आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की ‘माउंटेन रेस्क्यू टीम’ (Mountain Rescue Team) और एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है.
पिछले साल के खौफनाक हादसे से लिया सबक
गौरतलब है कि बीते साल 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोती में मचेल माता के दर्शनों के लिए गए श्रद्धालुओं पर कुदरत का कहर बरपा था. वहां अचानक बादल फटने से करीब 70 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 600 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस भयानक त्रासदी ने पहाड़ी तीर्थयात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. यही कारण है कि इस बार प्रशासन अमरनाथ यात्रा में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है.
पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार ट्रेनिंग
अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवानों को जम्मू के पहाड़ी इलाकों में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य जवानों को यात्रा मार्ग की भौगोलिक और दुर्गम परिस्थितियों से परिचित कराना है. इस सघन ट्रेनिंग में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने, मुश्किल हालातों में फंसे लोगों को सुरक्षित व तेजी से निकालने, त्वरित राहत पहुंचाने और संकरे रास्तों पर भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के विशेष गुर सिखाए जा रहे हैं.
बालटाल और पहलगाम रूट पर रहेंगे मुस्तैद
इस साल 57 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु कठिन रास्तों से होकर बाबा बर्फानी के प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए पहुंचेंगे. इसे देखते हुए ये विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान और SDRF की टीमें आधुनिक उपकरणों के साथ बालटाल और पहलगाम से लेकर पवित्र गुफा तक जाने वाले दोनों प्रमुख रास्तों पर तैनात रहेंगी. प्रशासन का दावा है कि इन जवानों की मुस्तैदी से प्राकृतिक चुनौतियों के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा को एक मजबूत कवच मिलेगा.
