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Budhaditya Yog 2026: कन्या राशि में सूर्य-बुध की युति, इन 5 राशियों पर होगा बड़ा असर


Budhaditya Yog 2026: 17 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में पहुंचेंगे, जहां बुध पहले से मौजूद हैं. दोनों ग्रहों की युति से बुधादित्य योग बनेगा. लेकिन इस बार कहानी में एक बड़ा मोड़ है. योग बनने के समय बुध अस्त अवस्था में रहेंगे और अगले ही दिन उनके उदित होने की गणना है. यानी एक ही बुधादित्य योग का प्रभाव महज 24 घंटे के भीतर बदल सकता है.

ऐसे में सवाल उठता है कि यह योग वास्तव में कितना ताकतवर होगा और किन राशियों को इसका सबसे अधिक असर दिखाई दे सकता है?

17 सितंबर को योग, 18 सितंबर से बदलेगा असर

बुध 7 सितंबर 2026 को कन्या राशि में प्रवेश कर चुके हैं. ज्योतिष में कन्या बुध की अपनी और उच्च राशि मानी जाती है. यहां बुध को तर्क, हिसाब-किताब, संवाद और कारोबारी फैसलों के मामले में मजबूत माना जाता है.

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17 सितंबर को सूर्य के कन्या राशि में आते ही बुधादित्य योग बन जाएगा. लेकिन प्रचलित ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार उस समय बुध अस्त रहेंगे. 18 सितंबर को बुध उदित होंगे. इसके बाद योग का प्रभाव अधिक स्पष्ट होने की संभावना मानी जा रही है.

अलग-अलग पंचांगों में बुध उदय के समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है. इसका कारण स्थान, अयनांश और गणना पद्धति का अलग होना है.

क्या अस्त बुध से योग खत्म हो जाएगा?

बुध का अस्त होना बुधादित्य योग को समाप्त नहीं करता, क्योंकि सूर्य और बुध एक ही राशि में मौजूद रहेंगे. हालांकि इसके परिणामों की तीव्रता कम हो सकती है.

सूर्य नेतृत्व, अधिकार और आत्मविश्वास के कारक माने जाते हैं. बुध का संबंध बुद्धि, व्यापार, वाणी और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है. इनके मिलने पर व्यक्ति तेजी से सोच सकता है, लेकिन बुध के अस्त रहने पर जल्दबाजी या अत्यधिक आत्मविश्वास गलती भी करा सकता है.

इसलिए 17 सितंबर को बड़े दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने, जल्दबाजी में कारोबारी वादा करने या अधूरी जानकारी पर फैसला लेने से पहले दोबारा जांच करना बेहतर रहेगा.

कितना ताकतवर होगा बुधादित्य योग?

इस योग की सबसे बड़ी ताकत इसका कन्या राशि में बनना है. बुध यहां अपनी सर्वाधिक मजबूत स्थितियों में से एक में माने जाते हैं. इसलिए अस्त होने के बावजूद उनकी क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं होगी.

कमजोरी यह है कि योग बनते समय बुध सूर्य के प्रभाव में रहेंगे. 18 सितंबर को बुध के उदित होने के बाद संवाद, योजना और निर्णय से जुड़े मामलों में स्थिति सुधर सकती है. इसे कमजोर योग के बजाय देर से अपनी पूरी ताकत दिखाने वाला बुधादित्य योग कहना ज्यादा सही होगा.

इन 5 राशियों पर दिखाई दे सकता है खास असर

वृषभ राशि: सूर्य-बुध की युति पंचम भाव में होने से पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा और रचनात्मक काम में नए अवसर मिल सकते हैं. निवेश में लाभ की संभावना रहेगी, लेकिन केवल गोचर देखकर पैसा लगाना ठीक नहीं होगा.

मिथुन राशि: बुध मिथुन राशि के स्वामी हैं. यह योग चौथे भाव में बनेगा. घर, प्रॉपर्टी और नौकरी से जुड़ा रुका फैसला आगे बढ़ सकता है. परिवार में अपनी बात रखते समय कठोर शब्दों से बचना होगा.

सिंह राशि: सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं और यह योग दूसरे भाव में बनेगा. वाणी, बचत और परिवार से जुड़े मामलों पर असर दिखाई दे सकता है. प्रभावशाली बातचीत लाभ दिला सकती है, लेकिन जल्दबाजी में किया गया आर्थिक वादा उलझन पैदा कर सकता है.

कन्या राशि: योग इसी राशि में बनने जा रहा है. आत्मविश्वास, बोलने के तरीके और निर्णय क्षमता में बदलाव आ सकता है. 18 सितंबर के बाद नौकरी या कारोबार से जुड़ी योजना अधिक स्पष्ट हो सकती है.

धनु राशि: सूर्य और बुध की युति कर्म भाव यानी दसवें भाव में होगी. नौकरी, पद और नई जिम्मेदारी के मामले में यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है. वरिष्ठ अधिकारी काम पर ध्यान दे सकते हैं, इसलिए छोटी गलती भी नजरअंदाज न करें.

किसे रहना होगा सावधान?

तुला राशि के लिए यह योग बारहवें और कुंभ राशि के लिए आठवें भाव में बनेगा. इन राशियों को खर्च, गोपनीय जानकारी और कार्यालय की राजनीति के मामले में सावधानी रखनी चाहिए. मीन राशि वालों को साझेदारी और रिश्तों में अपनी बात स्पष्ट रखनी होगी.

FAQ

1. बुधादित्य योग 2026 कब बनेगा?
17 सितंबर 2026 को सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने के बाद सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा.

2. क्या बुध के अस्त होने पर बुधादित्य योग नहीं बनता?
सूर्य और बुध के एक राशि में होने से योग बनता है. हालांकि बुध की अस्त अवस्था इसके शुरुआती प्रभाव को सीमित कर सकती है.

3. बुधादित्य योग कब तक रहेगा?
बुध के 26 सितंबर 2026 को कन्या राशि से निकलने तक सूर्य-बुध की युति बनी रहने की गणना है.

4. इस बुधादित्य योग से किन राशियों पर खास प्रभाव पड़ेगा?
सामान्य गोचर गणना के अनुसार वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या और धनु राशि पर इसका प्रभाव प्रमुख रूप से दिखाई दे सकता है.

5. बुधादित्य योग का वास्तविक फल कैसे तय होता है?
इसका व्यक्तिगत फल जन्मकुंडली में सूर्य-बुध की स्थिति, उनके अंश, भाव, ग्रह दृष्टि और दशा के आधार पर तय होता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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