आजकल कारें पहले के मुकाबले काफी एडवांस हो गई हैं. इनमें बेहतर साउंड इंसुलेशन, आधुनिक इंजन और कई ऐसी टेक्नोलॉजी दी जाती हैं, जिनकी वजह से ड्राइविंग के दौरान बाहर का शोर केबिन तक कम पहुंचता है. यही कारण है कि ज्यादातर कारों में इंजन की आवाज बहुत कम सुनाई देती है. लेकिन कई बार कुछ समय तक कार चलाने के बाद केबिन के अंदर इंजन की आवाज अचानक बढ़ने लगती है. शुरुआत में लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना महंगा पड़ सकता है.
दरअसल इंजन की आवाज में बदलाव कई तरह की तकनीकी समस्याओं का संकेत होता है. कभी इंजन ऑयल की कमी इसकी वजह बनती है, तो कभी बेल्ट, एग्जॉस्ट सिस्टम या इंजन माउंट में खराबी के कारण भी केबिन में ज्यादा आवाज आने लगती है. अगर समय रहते इसकी वजह का पता नहीं लगाया जाए, तो छोटी समस्या भी बड़ी खराबी में बदल सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कार के अंदर इंजन की आवाज आने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए.
इंजन ऑयल की कमी हो सकती है वजह
इंजन ऑयल कार के इंजन के अलग-अलग हिस्सों के बीच फ्रिक्शन कम करने का काम करता है. अगर इंजन में ऑयल का लेवल कम हो जाए या उसकी गुणवत्ता खराब हो जाए, तो इंजन के पार्ट्स के बीच फ्रिक्शन बढ़ जाता है. इसकी वजह से इंजन से टिक-टिक या खटखट जैसी आवाज आने लगती है. अगर डैशबोर्ड पर ऑयल प्रेशर की लाल चेतावनी लाइट जल रही है, तो गाड़ी चलाते रहना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकें और इंजन बंद कर दें. इसके बाद ऑयल लेवल की जांच कराएं.
इंजन माउंट खराब होने पर बढ़ती है आवाज
इंजन माउंट का काम इंजन को उसकी जगह पर मजबूती से पकड़कर रखना और उससे पैदा होने वाले वाइब्रेशन को कम करना होता है. इसमें रबर और धातु के हिस्से होते हैं. समय के साथ रबर कमजोर या खराब हो सकता है. ऐसा होने पर इंजन का वाइब्रेशन कार की बॉडी तक पहुंचने लगता है. इसके कारण केबिन में घरघराहट और वाइब्रेशन महसूस हो सकता है. खासकर जब कार स्टार्ट होती है, गियर बदला जाता है या एक्सीलरेटर दबाया जाता है, तब यह समस्या ज्यादा महसूस होती है.
एग्जॉस्ट सिस्टम में लीकेज
कार के एग्जॉस्ट सिस्टम का काम इंजन से निकलने वाली गैसों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना होता है. अगर एग्जॉस्ट पाइप, मफलर या किसी जोड़ में लीकेज हो जाए, तो इंजन की आवाज सामान्य से ज्यादा सुनाई देने लगती है. कई बार कार के नीचे से तेज घरघराहट या फटने जैसी आवाज आती है. ऐसी स्थिति में एग्जॉस्ट सिस्टम की जांच कराना जरूरी है. ध्यान रखें कि एग्जॉस्ट लीकेज से जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस केबिन में प्रवेश कर सकती है. अगर केबिन में धुएं या एग्जॉस्ट की गंध आए, तो गाड़ी रोककर सुरक्षित जगह पर उतरें और जांच होने तक उसका इस्तेमाल न करें.
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टाइमिंग बेल्ट या अन्य बेल्ट में खराबी
इंजन में कई तरह की बेल्ट का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें टाइमिंग बेल्ट और सर्पेंटाइन बेल्ट प्रमुख हैं. अगर इनमें ढीलापन आ जाए या ये घिसने लगें, तो इंजन के आसपास से चीखने, सीटी बजने या रगड़ने जैसी आवाज आ सकती है. बेल्ट खराब होने पर इंजन के दूसरे जरूरी हिस्सों का काम भी प्रभावित हो सकता है. इसलिए ऐसी आवाज लगातार सुनाई देने पर मैकेनिक से जांच कराना बेहतर है.
एयर फिल्टर और फैन की समस्या
कार का एयर फिल्टर इंजन में जाने वाली हवा को साफ करता है. अगर यह बहुत ज्यादा गंदा या ब्लॉक हो जाए, तो इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा कूलिंग फैन में खराबी या किसी हिस्से के ढीले होने से भी असामान्य आवाज आ सकती है. अगर इंजन के आसपास से तेज भनभनाहट या घिसने जैसी आवाज सुनाई देती है, तो फैन और एयर इनटेक सिस्टम की जांच करानी चाहिए.
इंजन में नॉकिंग की समस्या
अगर एक्सीलरेटर दबाते समय इंजन से धातु टकराने जैसी खटखट की आवाज आती है, तो यह इंजन नॉकिंग का संकेत हो सकता है. गलत ग्रेड का फ्यूल, ईंधन की गुणवत्ता, अधिक तापमान या इंजन से जुड़ी दूसरी समस्याएं इसकी वजह बन सकती हैं. लगातार नॉकिंग होने से इंजन के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए ऐसी आवाज आने पर इसे नजरअंदाज करने के बजाय सर्विस सेंटर पर जांच कराएं.
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