दिल्ली के जंतर-मंतर से सोमवार (20 जुलाई) को संसद मार्च के ऐलान के बाद ऐसी तस्वीर आई जो भयावह थी. सड़क पर बिखरी चप्पलें, रोते हुए छात्र-छात्राएं, भीड़ के बीच बेहोश पड़ा एक प्रदर्शनकारी और अपने बेटे के भविष्य की चिंता में संसद मार्च में शामिल हुई एक मां ने आपबीती सुनाई है.
सोमवार को संसद की ओर बढ़े प्रदर्शनकारियों की कहानी सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रही. दिन ढलते-ढलते यह आंदोलन कई ऐसे चेहरों और दृश्यों को पीछे छोड़ गया, जो दिनभर की उथल-पुथल की गवाही देते नजर आए. सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए नजर आए.
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प्रदर्शन को लेकर क्या बोला प्रदर्शनकारी छात्र
सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे एक वीडियो में 16 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी कहता है, “वह मार्च के दौरान सबसे आगे चल रहा था और अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया. मुझे बुरी तरह पीटा गया. मुझे समझ नहीं आ रहा.. मेरी गलती क्या थी. ‘एक अन्य वीडियो में एक प्रदर्शनकारी अचेत अवस्था में दिखाई देता है. उसके आसपास मौजूद लोग उसे संभालने और प्राथमिक सहायता देने की कोशिश करते नजर आते हैं.
एक वीडियो के अनुसार, “एक छात्रा रोते हुए कहती है कि वह सुबह से प्रदर्शन में मौजूद थी और पुलिस कार्रवाई के दौरान बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही थी. उसका आरोप है कि इसी दौरान उन पर लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों को पीटा गया.
दिनभर की अफरातफरी के बाद सड़क पर बिखरी चप्पलें भी बहुत कुछ कह रही थीं. यह स्पष्ट नहीं है कि वे किसकी थीं, लेकिन वे उस भागदौड़ और अव्यवस्था की मूक गवाह बन गईं, जिसने कुछ देर के लिए पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया.
एक मां ने खींचा सबका ध्यान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक मां की आवाज भी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचती रही. वीडियो में वह कहती है कि उसके पति दिल्ली पुलिस में हैं, लेकिन वह अपने बेटे के भविष्य की चिंता में प्रदर्शन में शामिल होने आई है.
सोशल मीडिया पर सामने आए ये वीडियो दिनभर की घटनाओं के अलग-अलग मानवीय पहलुओं को सामने लाते हैं. इनमें आंसू हैं, चोट के दावे हैं, अपनों की चिंता है और अपने भविष्य को लेकर सड़क पर उतरे युवाओं की बेचैनी हैं.
हालांकि, इन वीडियो में किए गए दावों की ‘पीटीआई भाषा’ स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता. सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी संसद मार्ग के निकट एकत्र हुए और परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया. सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद झड़प हुई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया.
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