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Earth Day 2026 Special: अथर्ववेद से पुराणों तक, अर्थ डे पर जानें पृथ्वी पर आधारित पवित्र श्लोक


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  • विश्व पृथ्वी दिवस पृथ्वी के महत्व और संरक्षण को रेखांकित करता है।
  • सनातन धर्म ग्रंथों में पृथ्वी को माता मानकर संरक्षण की सीख।
  • अथर्ववेद में पृथ्वी को जीवनदायिनी माता, हम उसके पुत्र।
  • विष्णु पुराण पृथ्वी को धारण करने वाली शक्ति के रूप में वर्णित।

Wolrld Earth Day 2026 Special: 22 अप्रैल को दुनियाभर में अर्थ डे यानी पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है. अर्थ है केवल एक औचारिक आयोजन नहीं बल्कि पृथ्वी के प्रति जारुकता बढ़ाने और जिम्मेदारी निभाने का भी दिन है. अर्थ डे हमें पृथ्वी के संरंक्षण और संतुलन का संदेश देता है.

पृथ्वी ने हमें जल-जीवन दिया, लेकिन आधुनिक समय में पर्यावरण संकट केवल मानव जाति ही नहीं बल्कि पृथ्वी के लिए भी गहरा संकट बन चुका है. इसलिए खासतौर पर इस समय विश्व पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी के महत्व को समझना भी बेहद जरूरी हो जाता है.

सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथ, वेद और पुराणों से हमें पृथ्वी के महत्व और उसके संरक्षण की सीख लेनी चाहिए. क्योंकि ग्रंथों में हजारों साल पहले ही पृथ्वी को ‘माता’ मानकर उसके सम्मान और संरक्षण की सीख दी जा चुकी है. अथर्ववेद से लेकर विष्णु पुराण तक, कई शास्त्रों में पृथ्वी की महिमा का वर्णन मिलता है.

अथर्ववेद में क्या है (Whai is Atharva Veda)

हिंदू धर्म के चार वेदों में अथर्ववेद चौथा और अंतिम वेद है, जिसे ‘ब्रह्मवेद’ या ‘भैषज्य वेद’ भी कहा जाता है. ऋषि अथर्वा और ऋषि अंगिरा इसके रचयिता माने जाते हैं. अथर्ववेद में लगभग 6,000 मंत्र, 20 काण्ड और 730 से अधिक सूक्त हैं. यह वेद मुख्य रूप से दैनिक जीवन, चिकित्सा, जड़ी-बूटियों और समाज से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान का भंडार माना जाता है.

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अथर्ववेद से पुराणों तक पृथ्वी का महत्व

माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” (अथर्ववेद 12.1.12)

अथर्ववेद के ‘पृथ्वी सूक्त’ में धरती को जीवनदायिनी माता के रूप में देखा गया है. अथर्वेद का यह मंत्र मनुष्य और पृथ्वी के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है. इसमें कहा गया है कि- पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं, यानी उसकी रक्षा करना हमारा परम धर्म है.

समुद्रवसने देवी पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥”

यह धरती माता को समर्पित प्रातःकालीन प्रार्थना है, जिसमें पृथ्वी को देवी स्वरूप माना गया है. पृथ्वी को ‘धारण करने वाली’ और ‘जीवन को स्थिर रखने वाली’ शक्ति बताया गया है. इस प्रार्थना में पृथ्वी को देवी मानकर उनसे क्षमा मांगी जाती है, जो सनातन संस्कृति में प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है.

पृथ्वी पर आधारित धार्मिक श्लोक- हमारे प्राचीन ग्रंथों में पृथ्वी (धरती) को माता, धैर्य, सरंक्षण और जीवन का आधार माना गया है, जिससे संबंधित कई सुंदर श्लोक मिलते हैं. विशेषकर अथर्ववेद का पृथ्वी सूक्त काफी प्रसिद्ध है. यहां देखें पृथ्वी और प्रकृति पर आधारिक कुछ प्रमुख श्लोक-

  • “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।” अथर्ववेद (पृथ्वी सूक्त)
  • “यस्यां समुद्र उत सिन्धुरापो, यस्यामन्नं कृष्टयः संबभूवुः।” अथर्ववेद (पृथ्वी सूक्त)
  • “विश्वम्भरा वसुधानी प्रतिष्ठा हिरण्यवक्षा जगतो निवेशनी।” अथर्ववेद
  • “भूमिर्भूम्ना धृतलोका देवि त्वं विष्णुना धृता।” विष्णु पुराण

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