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Engineers Jobs: AI की दौड़ में इंजीनियरों की बदलेगी किस्मत, इन 5 टेक्निकल जॉब्स में मिल रहे करोड़ों के पैकेज


इस नए बदलाव ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कई ऐसे नए करियर ऑप्शन खोले हैं, जिनके सैलरी पैकेज चौकाने वाले हैं. फारवर्ड डिप्लॉयड  इंजीनियर से लेकर एआई, क्लाउड, आर्किटेक्ट, बिग डेटा और साइबर सिक्योरिटी जैसे हाई पेइंग रोल्स में इस वक्त टैलेंट की बड़ी किल्लत है. इन रोल में काम करने वाले एक्सपीरियंस प्रोफेशनल्स को 40 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का सालाना पैकेज आसानी से मिल रहा है. ऐसे में चलिए आज हम आपको ऐसे पांच सबसे ज्यादा कमाई वाली इंजीनियरिंग जॉब्स के बारे में बताते हैं.

आज की टेक इंडस्ट्री में फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग का रोल सबसे तेजी से उभर रहा है. इसका मुख्य काम टेक्नोलॉजी और बिजनेस के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करना होता है. यह इंजीनियर लैब या कोडिंग एनवायरमेंट से बाहर निकलकर क्लाइंट के साथ सीधे काम करते हैं और एआई सॉफ्टवेयर टूल्स को बिजनेस की असली समस्याओं को सुलझाने के लिए डिप्लॉयड करते हैं. स्केलर और साइबर मीडिया रिसर्च की इंडियाज एफडीई अपॉर्चुनिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार 88 प्रतिशत भारतीय कंपनियों का मानना है कि 2030 तक एफडीई की डिमांड तेजी से बढ़ेगी. रिपोर्ट के अनुसार खास बात यह है कि इस रोल में काम करने वाले 80 प्रतिशत इंजीनियर का सालाना पैकेज 40 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच है, जिसमें 30 प्रतिशत तक का सैलरी प्रीमियम मिलता है

आज की टेक इंडस्ट्री में फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग का रोल सबसे तेजी से उभर रहा है. इसका मुख्य काम टेक्नोलॉजी और बिजनेस के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करना होता है. यह इंजीनियर लैब या कोडिंग एनवायरमेंट से बाहर निकलकर क्लाइंट के साथ सीधे काम करते हैं और एआई सॉफ्टवेयर टूल्स को बिजनेस की असली समस्याओं को सुलझाने के लिए डिप्लॉयड करते हैं. स्केलर और साइबर मीडिया रिसर्च की इंडियाज एफडीई अपॉर्चुनिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार 88 प्रतिशत भारतीय कंपनियों का मानना है कि 2030 तक एफडीई की डिमांड तेजी से बढ़ेगी. रिपोर्ट के अनुसार खास बात यह है कि इस रोल में काम करने वाले 80 प्रतिशत इंजीनियर का सालाना पैकेज 40 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच है, जिसमें 30 प्रतिशत तक का सैलरी प्रीमियम मिलता है

वहीं एआई और मशीन लर्निंग इंजीनियर ऐसे स्मार्ट एल्गोरिथम और मॉडल तैयार करते हैं, जिससे मशीनों और सॉफ्टवेयर डेटा से सीख कर इंसानों की तरह डिसीजन लेने में सक्षम हो सके. बिन क्यूएलई टैलेंट इंटेलिजेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार भारत को 2026 में लगभग 14 लाख एआई प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी. जबकि बाजार में सिर्फ 4 लाख टैलेंट ही उपलब्ध है. इसी भारी कमी के कारण इस फील्ड में सैलरी में 30 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक का तगड़ा उछाल देखा गया है.

वहीं एआई और मशीन लर्निंग इंजीनियर ऐसे स्मार्ट एल्गोरिथम और मॉडल तैयार करते हैं, जिससे मशीनों और सॉफ्टवेयर डेटा से सीख कर इंसानों की तरह डिसीजन लेने में सक्षम हो सके. बिन क्यूएलई टैलेंट इंटेलिजेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार भारत को 2026 में लगभग 14 लाख एआई प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी. जबकि बाजार में सिर्फ 4 लाख टैलेंट ही उपलब्ध है. इसी भारी कमी के कारण इस फील्ड में सैलरी में 30 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक का तगड़ा उछाल देखा गया है.

सॉफ्टवेयर और क्लाउड आर्किटेक्ट भी इस लिस्ट में शामिल है.  दरअसल क्लाउड आर्किटेक्ट का काम किसी भी डिजिटल एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर का ऐसा ढांचा तैयार करना होता है, जिससे जब लाखों यूजर्स एक साथ एक ऐप पर आए, तब भी ऐप सिस्टम बिना क्रेश हुए स्मूथली चलता रहे. अडेको की ‘इंडिया सैलरी गाइड 2026 के अनुसार 3 से 7 साल के एक्सपीरियंस वाले क्लाउड आर्किटेक्ट को 20 लाख से 30 लाख रुपये तक का पैकेज मिलता है.

सॉफ्टवेयर और क्लाउड आर्किटेक्ट भी इस लिस्ट में शामिल है.  दरअसल क्लाउड आर्किटेक्ट का काम किसी भी डिजिटल एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर का ऐसा ढांचा तैयार करना होता है, जिससे जब लाखों यूजर्स एक साथ एक ऐप पर आए, तब भी ऐप सिस्टम बिना क्रेश हुए स्मूथली चलता रहे. अडेको की ‘इंडिया सैलरी गाइड 2026 के अनुसार 3 से 7 साल के एक्सपीरियंस वाले क्लाउड आर्किटेक्ट को 20 लाख से 30 लाख रुपये तक का पैकेज मिलता है.

इसके अलावा डेटा इंजीनियर बैकएंड में रहकर ऐसा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करते हैं, जो भारी भरकम डेटा को कलेक्ट, मैनेज और प्रोसेस करता है. इसी डेटा का एनालिसिस करके कंपनी मार्केट ट्रेंड्स और कस्टमर रिव्यू को समझ पाती है.  एक और रिपोर्ट के अनुसार 2026 में डेटा इंजीनियर को देशभर में जॉब पोस्टिंग के मामले में तीसरे स्थान पर रखा गया है. अकेले बेंगलुरु में इनका औसतन पैकेज 22 लाख रुपये सालाना है.

इसके अलावा डेटा इंजीनियर बैकएंड में रहकर ऐसा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करते हैं, जो भारी भरकम डेटा को कलेक्ट, मैनेज और प्रोसेस करता है. इसी डेटा का एनालिसिस करके कंपनी मार्केट ट्रेंड्स और कस्टमर रिव्यू को समझ पाती है.  एक और रिपोर्ट के अनुसार 2026 में डेटा इंजीनियर को देशभर में जॉब पोस्टिंग के मामले में तीसरे स्थान पर रखा गया है. अकेले बेंगलुरु में इनका औसतन पैकेज 22 लाख रुपये सालाना है.

लास्ट में ब्लॉकचेन और साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर भी इसी लिस्ट में शामिल है. दरअसल जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया बढ़ रही है, साइबर हमलों और डेटा चोरी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर पूरे नेटवर्क को हैक करने से बचाते हैं, जबकि ब्लॉकचेन इंजीनियर ऐसा सुरक्षित नेटवर्क बनाते हैं, जिसमें डेटा से छेड़छाड़ नामुमकिन हो. डेटा सिक्योरिटी काउंसलिंग ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 73 प्रतिशत कंपनियों में स्किल्ड साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट की बड़ी कमी है. वहीं कुछ और आंकड़ों के अनुसार ब्लॉकचेन इंजीनियर का औसतन पैकेज 10.2 लाख सालाना से शुरू होकर एक्सपीरियंस के साथ कई गुना बढ़ता है.

लास्ट में ब्लॉकचेन और साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर भी इसी लिस्ट में शामिल है. दरअसल जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया बढ़ रही है, साइबर हमलों और डेटा चोरी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर पूरे नेटवर्क को हैक करने से बचाते हैं, जबकि ब्लॉकचेन इंजीनियर ऐसा सुरक्षित नेटवर्क बनाते हैं, जिसमें डेटा से छेड़छाड़ नामुमकिन हो. डेटा सिक्योरिटी काउंसलिंग ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 73 प्रतिशत कंपनियों में स्किल्ड साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट की बड़ी कमी है. वहीं कुछ और आंकड़ों के अनुसार ब्लॉकचेन इंजीनियर का औसतन पैकेज 10.2 लाख सालाना से शुरू होकर एक्सपीरियंस के साथ कई गुना बढ़ता है.

Published at : 01 Nov 2026 06:47 PM (IST)

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