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Exercising During Periods: पीरियड्स में भी ज्ञानेश्वरी ने उठाया 111 किलो वजन, ऐसे बनाए रखें अपनी एनर्जी


Period Impact On Women Sports Performance: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया. लेकिन उनकी जीत से ज्यादा चर्चा उस बात की हुई, जो उन्होंने मुकाबले के बाद सबके सामने बेझिझक कही. मेडल जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने बताया कि प्रतियोगिता का दिन उनके पीरियड्स का पहला दिन था. उन्होंने कहा कि ‘आज मेरे पीरियड्स का पहला दिन था. मुझे नहीं पता था कि मेरा शरीर कैसा प्रदर्शन करेगा. फिर भी मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की. मेरे कोच ने मुझ पर भरोसा जताते हुए 111 किलो वजन उठाने का मौका दिया. मैंने ट्रेनिंग में यह वजन उठाया था, लेकिन क्लीन एंड जर्क में पहले कभी ऐसा नहीं कर पाई थी.’

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और एक बार फिर यह सवाल उठने लगा कि क्या पीरियड्स के दौरान महिलाएं अपनी पूरी क्षमता से खेल सकती हैं? क्या मासिक धर्म के दौरान ताकत, स्टैमिना और प्रदर्शन वास्तव में कम हो जाता है या यह सिर्फ एक आम धारणा है?

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हर महिला का अनुभव अलग होता है

गायनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीरियड्स के शुरुआती दिनों में कई महिलाओं को पेट दर्द, थकान, पेट फूलना और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में एक्सरसाइज या खेल के दौरान शरीर पहले से ज्यादा थका हुआ महसूस हो सकता है. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर महिला का प्रदर्शन खराब ही होगा. डॉक्टर बताती हैं कि अब तक हुई वैज्ञानिक रिसर्च में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि पीरियड्स के दौरान सभी महिलाओं की ताकत, सहनशक्ति या पावर में एक जैसी कमी आती है.

कई एथलीट्स पीरियड्स में भी जीतती हैं बड़े मुकाबले

डॉ. बजाज कहती हैं कि दुनिया की कई शीर्ष महिला खिलाड़ी अपने मासिक धर्म के दौरान भी नियमित ट्रेनिंग करती हैं और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करती हैं. हालांकि जिन महिलाओं को अत्यधिक दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग या गंभीर असहजता होती है, उनके लिए ट्रेनिंग और रिकवरी थोड़ी मुश्किल हो सकती है. उनके अनुसार हर महिला का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है. इसलिए किसी एक नियम को सभी पर लागू नहीं किया जा सकता. खिलाड़ियों के लिए उनकी शारीरिक स्थिति और लक्षणों के अनुसार अलग-अलग रणनीति अपनाना ज्यादा फायदेमंद होता है.

हार्मोन में बदलाव का असर पड़ सकता है

पीरियड्स के दौरान शरीर में हार्मोन लगातार बदलते रहते हैं. यही बदलाव कई बार ऊर्जा, मूड और ट्रेनिंग करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. डॉक्टर बताती हैं कि पीरियड्स के बाद आने वाले फॉलिक्युलर फेज में एस्ट्रोजन हार्मोन धीरे-धीरे बढ़ता है. इस दौरान कुछ महिलाओं को पहले की तुलना में ज्यादा ऊर्जा महसूस होती है और वर्कआउट के बाद रिकवरी भी बेहतर होती है. वहीं ल्यूटल फेज में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ने के कारण कुछ महिलाओं को अधिक थकान, शरीर का तापमान बढ़ने और एक्सरसाइज के दौरान जल्दी थकने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. हालांकि ये बदलाव हर महिला में समान नहीं होते। इसलिए सिर्फ पीरियड्स के चरणों के आधार पर ट्रेनिंग प्लान तैयार करना साइंटिस्ट रूप से सही नहीं माना जाता.

ट्रेनिंग नहीं, शरीर के संकेतों को समझना ज्यादा जरूरी

एक्सपर्ट का मानना है कि खिलाड़ियों को अपने शरीर के संकेतों को समझना सीखना चाहिए. अगर किसी दिन दर्द ज्यादा है या थकान महसूस हो रही है तो ट्रेनिंग की तीव्रता कम की जा सकती है. वहीं जब शरीर अच्छा महसूस करे तो सामान्य तरीके से अभ्यास जारी रखा जा सकता है. कोच और खिलाड़ियों के बीच बेहतर संवाद भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर ट्रेनिंग, आराम और रिकवरी में बदलाव किया जा सके. हर खिलाड़ी के लिए एक जैसा प्लान कारगर नहीं होता.

पीरियड्स के दौरान कैसे बनाए रखें बेहतर प्रदर्शन?

डॉ. अर्चना धवन बजाज के अनुसार सही खानपान, पर्याप्त पानी और अच्छी रिकवरी पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकती है. वह सलाह देती हैं कि आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे पालक, बीन्स, दालें, फोर्टिफाइड अनाज और लीन मीट को भोजन में शामिल करना चाहिए, क्योंकि ब्लीडिंग के दौरान शरीर से आयरन की कमी हो सकती है. मांसपेशियों की रिकवरी के लिए पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी है, जबकि कार्बोहाइड्रेट शरीर को दोबारा ऊर्जा देने में मदद करते हैं. इसके अलावा पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिन्हें ज्यादा ब्लीडिंग होती है.

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दर्द को नजरअंदाज न करें

अगर पीरियड्स के दौरान दर्द या ऐंठन ज्यादा हो रही है तो हल्का वार्म-अप, स्ट्रेचिंग, हीट थेरेपी और डॉक्टर की सलाह से एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं राहत दे सकती हैं. अच्छी नींद लेना और शरीर को पर्याप्त आराम देना भी उतना ही जरूरी है. डॉक्टर यह भी सलाह देती हैं कि अगर किसी महिला को हर महीने असहनीय दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग या अनियमित पीरियड्स की समस्या रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है ताकि किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का समय रहते इलाज किया जा सके.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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