बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भांजे और अभिनेता इमरान खान को मुंबई पुलिस द्वारा ‘भारत छोड़ने का नोटिस’ दिए जाने के बाद से कानूनी और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. अभिनेता को 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है. यह पूरा मामला एक विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी, उनके विदेशी नागरिक होने की स्थिति और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड के नियमों से जुड़ा है.
इस पूरे प्रकरण में आव्रजन, विदेशियों से जुड़े कानून और ओसीआई कार्डधारकों के कानूनी अधिकारों से जुड़े कई अहम पहलू शामिल हैं. आइए इन सभी कानूनी दांव-पेचों को एक-एक कर समझते हैं.
मामला क्या है और पुलिस की कार्रवाई का आधार क्या है?
हाल ही में अभिनेता इमरान खान मुंबई में एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे. इस प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया.
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इमरान खान के पास संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की नागरिकता है और वे भारत में एक ओसीआई (OCI) कार्डधारक के रूप में रह रहे हैं. चूंकि वे भारत के नागरिक नहीं हैं, इसलिए स्थानीय पुलिस और आव्रजन अधिकारियों ने फॉरेनर्स एक्ट के प्रावधानों के तहत उनके इस एक्शन को विदेशी नागरिकों के लिए तय नियमों का उल्लंघन माना और उन्हें देश छोड़ने का नोटिस थमा दिया.
क्या पुलिस किसी विदेशी या ओसीआई कार्डधारक को देश छोड़ने का आदेश दे सकती है?
किसी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने की मूल शक्ति केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) के पास होती है हालांकि, फॉरनर्स एक्ट, 1946 के तहत प्रशासनिक व्यवस्थाओं के जरिए ये शक्तियां राज्य सरकारों और पुलिस के विदेशी पंजीकरण अधिकारियों (FRRO/FRO) को भी दी जाती है.
यदि कोई विदेशी नागरिक भारत की संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था, या देश के कानूनों के खिलाफ गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो राज्य प्रशासन और पुलिस प्राधिकारी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ‘लीव इंडिया नोटिस’ जारी कर सकते हैं.
हालांकि पुलिस या प्रशासनिक तंत्र नोटिस जारी कर सकता है, लेकिन जिस व्यक्ति को नेटिस जारी होता है उसके पास इस आदेश को उच्च न्यायालय या कानूनी मंचों पर चुनौती देने का अधिकार होता है, जहां यह देखा जाता है कि प्रक्रिया का पालन सही से हुआ है या नहीं.
OCI कार्ड क्या है और इसके तहत भारत में रहने के नियम क्या हैं?
ओसीआई योजना ऐसे लोगों के लिए शुरू की गई थी जो भारतीय मूल के हैं लेकिन उनके पास किसी अन्य देश की नागरिकता है. नाम में ‘सिटिजन’ शब्द होने के बावजूद ओसीआई कार्डधारक भारत के नागरिक नहीं होते, बल्कि वे कानूनी रूप से विदेशी नागरिक ही होते हैं.
ओसीआई कार्डधारकों को भारत में अनिश्चितकाल तक रहने, अचल संपत्ति खरीदने (कृषि भूमि को छोड़कर) और व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की छूट मिलती है. उन्हें सामान्य विदेशी नागरिकों की तरह बार-बार वीजा लेने या FRRO में पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ती.
ओसीआई कार्डधारकों के लिए पाबंदियां और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक
कानूनी रूप से ओसीआई कार्डधारकों को कई अधिकार मिलते हैं, लेकिन उनपर कुछ प्रतिबंध भी हैं जैसे संविधान के तहत ओसीआई कार्डधारकों को भारतीय नागरिकों की तरह राजनीतिक अधिकार हासिल नहीं होते. वे भारत में मतदान नहीं कर सकते और न ही संसद या विधानसभा के चुनाव लड़ सकते हैं.
चूंकि वे विदेशी नागरिक हैं, इसलिए देश की घरेलू राजनीति, संवेदनशील राजनीतिक रैलियों या विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेने के उनके अधिकार बेहद सीमित या प्रतिबंधित माने जाते हैं. यदि कोई विदेशी नागरिक स्थानीय राजनीतिक या संवेदनशील आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो इसे वीजा नियमों और ओसीआई शर्तों का उल्लंघन माना जा सकता है.
नागरिकता अधिनियम की धारा 7D के तहत यदि कोई ओसीआई कार्डधारक देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है या भारत की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति के खिलाफ आचरण करता है, तो सरकार उसका ओसीआई पंजीकरण रद्द भी कर सकती है.
इस मामले में अब आगे क्या हो सकता है
इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में अभिनेता इमरान खान और उनके वकीलों के पास अभी भी कई कानूनी रास्ते और विकल्प मौजूद हैं. उसको भी हम जान लेते हैं.
1- इमरान खान इस ‘लीव इंडिया’ नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं. वे याचिका में यह तर्क रख सकते हैं कि उनका कृत्य किसी भी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं था और उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया.
2- यदि सरकार उनके ओसीआई कार्ड को रद्द करने की कार्रवाई शुरू करती है, तो उन्हें नागरिकता अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा.
3-वे संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिक हैं, इसलिए अमेरिकी दूतावास के माध्यम से भी कांसुलर एक्सेस या राजनयिक स्तर पर सहायता का विकल्प खुला रहता है, हालांकि घरेलू कानूनों के मामलों में स्थानीय न्यायपालिका सर्वोपरि होती है.
