सर्बिया में हुए मध्यावधि संसदीय चुनावों में एक ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलनों से उभरी ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने 14 साल से सत्ता पर काबिज सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी को मात देकर संसद में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है. चुनाव नतीजों के रुझान सामने आने के बाद पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने अपनी हार स्वीकार कर ली है.
इस ऐतिहासिक चुनाव परिणाम और सर्बिया में हुए बड़े उलटफेर से जुड़ी 10 बड़ी बातें आइए जानते हैं.
14 साल पुराने ‘SNS’ के शासन का अंत
अलेक्जेंडर वुसिक की पार्टी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) वर्ष 2012 से सर्बिया की सत्ता पर काबिज थी. इस चुनाव नतीजे के साथ ही देश में उनके 14 साल लंबे वर्चस्व और एकछत्र शासन का आधिकारिक तौर पर अंत हो गया है.
‘स्टूडेंट लिस्ट’ को मिला पूर्ण बहुमत
स्वतंत्र पोलिंग एजेंसियों के शुरुआती रुझानों के अनुसार ‘स्टूडेंट लिस्ट, स्टूडेंट्स विन’ को 52% वोट मिले हैं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी आगे है. वहीं वुसिक के गठबंधन ‘अलेक्जेंडर वुसिक यूनाइटेड सर्बिया’ को महज 39.3% वोट हासिल हुए.
संसद की सीटों का समीकरण (135-140 सीटें)
सर्बिया की 250 सीटों वाली एकसदनीय संसद में सरकार बनाने के लिए 126 सीटों की आवश्यकता होती है. वुसिक के आकलन के अनुसार, छात्र समर्थित गठबंधन को 135 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन को केवल 105 सीटों के आसपास ही संतोष करना पड़ेगा.
22 लाख वोटरों का मिला साथ
अलेक्जेंडर वुसिक द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, छात्र समर्थित आंदोलन/सूची को लगभग 22 लाख वोट मिले, जबकि उनके सत्तारूढ़ गठबंधन को करीब 17.2 लाख वोट ही मिल सके.
चुनाव नतीजों से पहले ही वुसिक ने मानी हार
आधिकारिक नतीजों की घोषणा से पहले ही बेलग्रेड स्थित अपने अभियान मुख्यालय से संबोधित करते हुए वुसिक ने औपचारिक रूप से हार स्वीकार कर ली. उन्होंने कहा कि समर्थकों को असमंजस से बचाने और हार न स्वीकार करने की अफवाहों को खारिज करने के लिए उन्होंने पहले ही रुझानों को सार्वजनिक किया है.
‘डर पर साहस की जीत’, छात्र नेताओं का संदेश
बेलग्रेड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और छात्र आंदोलन के प्रमुख उम्मीदवार रादोमिर साइसिक ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया. उन्होंने कहा, “यह डर पर साहस की, निराशा पर उम्मीद की जीत है. यह जीत किसी एक का निजी ट्रॉफी नहीं, बल्कि पूरे सर्बियाई नागरिकों की जीत है.”
कैसे शुरू हुआ था यह छात्र आंदोलन?
यह ऐतिहासिक जन-आंदोलन नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की शेड/छत गिरने से शुरू हुआ था, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी. इस त्रासदी ने सरकारी भ्रष्टाचार, लापरवाही और जवाबदेही की कमी के खिलाफ देशव्यापी गुस्से को जन्म दिया, जिसने लगभग दो साल तक विश्वविद्यालय की नाकेबंदी और व्यापक विरोध प्रदर्शनों का रूप ले लिया.
संस्थागत सुधार और भ्रष्टाचार पर लगाम का वादा
नोवी साद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इलिजा एसर्दैनोविक के नेतृत्व वाले इस छात्र आंदोलन ने स्थापित राजनीतिक दलों को चुनौती दी. उनका चुनावी एजेंडा देश में मजबूत संस्थागत सुधारों, निष्पक्षता और भ्रष्टाचार विरोधी कड़े कदमों पर आधारित था.
चुनाव के लिए वुसिक ने दिया था इस्तीफा
संसदीय चुनाव लड़ने और अपनी पार्टी की अगुवाई करने के लिए अलेक्जेंडर वुसिक ने 27 सितंबर को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. सर्बिया में अब नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए दिसंबर के अंत तक मतदान कराया जाना प्रस्तावित है.
भारी मतदान और विपक्ष की भूमिका
250 संसदीय सीटों के लिए आयोजित इस चुनाव में 18 चुनावी सूचियां मैदान में थीं और करीब 64.5 लाख मतदाता पंजीकृत थे. चुनाव में मात खाने के बाद अलेक्जेंडर वुसिक ने घोषणा की है कि उनका राजनीतिक दल संसद में एक एकजुट विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाएगा.
