दुनिया इस वक्त इतिहास के सबसे नाजुक और भयावह मोड़ पर खड़ी है. एक तरफ मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और हूति विद्रोहियों का भीषण टकराव, दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच मची तबाही, और ऊपर से उत्तर कोरिया का बारूद में घी डालना. इन सभी घटनाक्रमों ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुनिया अब एक पूर्णकालिक ‘तृतीय विश्व युद्ध’ की कगार पर पहुंच चुकी है?
कूटनीतिक शांति वार्ताओं के तमाम दावों को दरकिनार कर युद्ध के ये तीनों मोर्चे अब एक भयानक महायुद्ध का रूप लेते दिख रहे हैं.
पहला मोर्चा: मिडिल ईस्ट, अमेरिकी हमले का डर और ईरान की महायुद्ध की चेतावनी
ईरान के इस दावे के बाद कि अमेरिका उस पर अब तक के सबसे बड़े और नए बमबारी अभियान की तैयारी कर रहा है, पूरा मध्य पूर्व थर्रा उठा है. ईरानी अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ईरान-समर्थित ठिकानों और उसके बेहद संवेदनशील केंद्रों पर हवाई हमले तेज करने की योजना बना रहा है.
तेहरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अमेरिकी दुस्साहस का ऐसा ‘निर्णायक और भीषण’ जवाब दिया जाएगा, जो पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में धकेल देगा.
हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन क्षेत्र में उसके युद्धपोतों, विमानवाहकों और सैन्य टुकड़ियों की आक्रामक तैनाती इस बात की गवाही दे रही है कि बारूद बिछ चुका है, बस एक चिंगारी की देरी है.
दूसरा मोर्चा: सऊदी-हूति संघर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक से ठीक पहले यमन के ईरान-समर्थित हूति विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों व ड्रोन से ताबड़तोड़ हमले कर आग में पेट्रोल डालने का काम किया है.
सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद की ओर आती मिसाइल को तो मार गिराया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास धुएं का उठता गुबार यह बताने के लिए काफी था कि हमला कितना बड़ा था. साथ ही अरामको की तेल व गैस सुविधाओं को निशाना बनाया गया.
इस प्रत्यक्ष हमले के बाद अमेरिकी प्रशासन में हड़कंप मच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी छुट्टियां रद्द कर यमन में हूति ठिकानों पर सीधे सैन्य हमले के विकल्पों पर विचार करने के लिए उच्च-स्तरीय आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए हाई-अलर्ट सुरक्षा चेतावनियां जारी कर दी हैं.
तीसरा मोर्चा: रूस-यूक्रेन युद्ध और मास्कॉ पर 1,600 ड्रोन हमला
रूस-यूक्रेन युद्ध अब पारंपरिक ज़मीनी जंग की सीमाओं को लांघकर एक खौफनाक हवाई और ड्रोन महायुद्ध में तब्दील हो चुका है. यूक्रेन ने रूस के इतिहास का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया. मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, 1,600 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए गए, जिनमें से 450 का रुख सीधे मॉस्को की तरफ था. मॉस्को की एक मुख्य तेल रिफाइनरी में आग की भयावह लपटें देखी गईं, जिसने रूस में ईंधन संकट पैदा कर दिया है.
उत्तर कोरिया का उकसावा
वैश्विक अस्थिरता का फायदा उठाते हुए उत्तर कोरिया ने भी अपने पूर्वी तट से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अमेरिका को खुली चुनौती दी है.
क्या ये संकेत महायुद्ध की ओर इशारा कर रहे हैं?
यदि मिडिल ईस्ट और यूरोप-एशिया के इन मोर्चों को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह संघर्ष सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध में बदल जाएगा, जिसके 10 भयावह परिणाम पूरी दुनिया को झेलने होंगे:
वैश्विक ऊर्जा संकट और बेकाबू महंगाई: ‘स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज’ बंद होने से कच्चे तेल की आपूर्ति ठप होगी, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छुएंगी और हर चीज़ महंगी हो जाएगी.
सुपरपावर्स का सीधा टकराव: अमेरिका, रूस, ईरान और इजराइल के सीधे आमने-सामने आने से गुटबाज़ी में पूरी दुनिया बंट जाएगी.
रूसी मुख्य भूमि पर विनाश: मॉस्को जैसे सुरक्षित शहरों पर सीधे हमलों से रूस का धैर्य टूट रहा है, जो एक बेहद आक्रामक जवाबी कार्रवाई को जन्म देगा.
नाटो की सीधी एंट्री: यूरोप की धरती पर युद्ध फैलने से नाटो देशों का सीधे तौर पर रूस के साथ युद्ध में कूदना तय माना जा रहा है.
परमाणु युद्ध का साया: वैश्विक महाशक्तियों के बीच अस्तित्व की लड़ाई छिड़ने पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंका अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर है.
विश्वव्यापी अकाल और खाद्यान्न संकट: रूस और यूक्रेन से गेहूं और खाद (Fertilizers) की आपूर्ति ठप होने से गरीब और विकासशील देशों में भयानक भुखमरी फैलेगी.
इतिहास का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट: करोड़ों बेघर लोग सीमाओं की ओर भागेंगे, जिससे यूरोप और एशियाई देशों की व्यवस्था चरमरा जाएगी.
अंतरराष्ट्रीय नियमों का पतन: UN और वैश्विक संधियों के बेअसर होने से “जिसकी लाठी उसकी भैंस” का जंगल राज कायम हो जाएगा.
महामंदी : शेयर बाज़ार क्रैश होंगे और व्यापार बंद होने से दुनिया भर में करोड़ों नौकरियां खत्म होंगी.
कूटनीति का पूर्ण अंत: संयुक्त राष्ट्र (UN) पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुका है. जब संवाद के सारे रास्ते बंद हो जाएं, तो महायुद्ध ही अंतिम परिणति बनती है.
क्या संभाला जा सकता है यह संकट?
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शांति संगठन गिड़गिड़ा रहे हैं कि दुनिया किसी नए महायुद्ध को झेलने की स्थिति में नहीं है. लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि न तो वाशिंगटन झुकने को तैयार है, न तेहरान, और न ही मॉस्को. अगर अगले कुछ दिनों में कूटनीति के जरिए इन जलती हुई चिंगारियों को नहीं बुझाया गया, तो आने वाली पीढ़ी इस दौर को ‘तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत’ के रूप में पढ़ेगी.
