जिंदगी भर नौकरी करने के बाद हर व्यक्ति रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी से कई जरूरी काम पूरे करने की योजना बनाता है, लेकिन सोचिए अगर विभाग रिटायरमेंट के बाद ग्रेच्युटी की रकम रोक दें और उसके पीछे की वजह आपके खिलाफ पेंडिंग एफआईआर दर्ज होना हो तो जाहिर सी बात है कि इससे आपकी दिक्कत बढ़ सकती है. इस बीच गुजरात हाईकोर्ट में ऐसा ही एक मामला सामने आया है और इस मामले पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला भी सुनाया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर मामला क्या है और कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?
ग्रेच्युटी क्या होती है?
सबसे पहले तो ये जानते हैं कि आखिर ग्रेच्युटी होती क्या है और किसे मिलती है. ग्रेच्युटी वह रकम है, जो कंपनी अपने कर्मचारी को नौकरी की तय शर्तें पूरी होने के बाद देती है. ये रकम आमतौर पर रिटारयमेंट के बाद दी जाती है. हां, लेकिन कर्मचारी को कितने पैसे मिलेंगे, ये उसकी सैलरी और नौकरी की अवधि पर भी निर्भर करते हैं.
कर्मचारी के खिलाफ क्यों दर्ज हुई FIR?
अहम सवाल ये है कि आखिर कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों हुई है. जानकारी के मुताबिक, कर्मचारी के खिलाफ साल 2017 में FIR दर्ज हुई थी. ये FIR कर्मचारी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में दर्ज हुई थी. कर्मचारी इस सोसायटी में पदाधिकारी थे. यही वजह है कि उन्हें इस आपराधिक मामले में आरोपी बनाया गया.
FIR की वजह से रोकी ग्रेच्युटी
कर्मचारी मई 2025 में रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद विभाग ने इसी पेंडिंग एफआईआर की वजह से उनकी ग्रेच्युटी रोक दी. इसके बाद ही मामला गुजरात हाईकोर्ट तक पहुंचा. हाईकोर्ट ने इस मामले पर अहम फैसले भी सुनाए.
चपरासी के पद पर नियुक्ति हुई
बता दें कि अरावली जिला पंचायत में काम कर चुके कर्मचारी की नियुक्ति 1991 में तालुका विकास कार्यालय में चपरासी के पद पर हुई थी. हां, लेकिन बाद में उनका प्रमोशन हो गया था.
प्रमोशन के बाद क्या बनें?
चपरासी के पद के बाद जब प्रमोशन हुआ तो वे सीनियर क्लर्क बन गए. अहम बात ये है कि नौकरी के दौरान ही वे क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी में भी पदाधिकारी थे. लेकिन जब वे रिटायर हुए तो विभाग ने उनकी ग्रेच्युटी को ही रोक दिया.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले पर हाईकोर्ट ने पाया कि कर्मचारी के खिलाफ कोई विभागीय जांच शुरू नहीं की गई थी. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सोसायटी में जो भी गड़बड़ी हुई है उससे कर्मचारी की सरकारी नौकरी का कोई कनेक्शन नहीं है.
हाई कोर्ट का फैसला?
कोर्ट का मामले पर कहना था कि ग्रेच्युटी कर्चमारी को सालों तक काम करने के बदले मिलने वाला लाभ है. इसलिए अगर इसे रोकना है तो इसके लिए कोई कानूनी आधार होना जरूरी है. केवल एफआईआर पेंडिंग होने की वजह से कर्मचारी की ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती है.
पैसे देने का दिया आदेश
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अधिकारियों को कर्मचारी की ग्रेच्युटी की रकम आठ हफ्तों के अंदर देने की आदेश दिया है.
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