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Explained: US-ईरान जंग के बाद 5वीं बार तेहरान क्यों गए आसिम मुनीर और क्या खाली हाथ लौटे?


पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर 20 अक्टूबर 2026 को हाई लेवल डेलिगेशन के साथ ईरान पहुंचे. अमेरिका से जंग में फंसे ईरान में राजनयिक गतिरोध चरम पर है और पाकिस्तान ‘मध्यस्थ’ का रोल निभा रहा है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने दौरे की वजह नहीं बताई, लेकिन फिर सामने आया कि पाकिस्तान और ईरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ अमेरिका से उलझे मामलों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है. आखिर मुनीर के ईरान जाने की पुख्ता वजहें क्या हैं और इशारा किस ओर है…

पाकिस्तान से आसिम मुनीर तेहरान क्यों गए?

इस दौरे की तीन बड़ी वजहें सामने आई हैं:

  • द्विपक्षीय संबंध और सीमा सहयोग: ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई गश्घावी ने साफ कहा कि यह दौरा ‘सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों, सीमा सहयोग और पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने के दायरे में’ है. दोनों देशों के बीच व्यापारिक सीमा पहले अस्थायी रूप से बंद थी, जिसे मुनीर ने अपनी यात्रा के दौरान खोलने की घोषणा की.
  • अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता: यही इस दौरे का सबसे संवेदनशील हिस्सा था. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, मुनीर के दौरे का मकसद ईरान और अमेरिका के बीच ‘मध्यस्थता’ करना था. पाकिस्तान पहले भी इस भूमिका में रहा है. जून 2026 में हुए सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका रही थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका.
  • क्षेत्रीय संदर्भ पर चर्चा: मुनीर की यात्रा ऐसे समय हुई जब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी तेहरान में थे और अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ इजराइल के दौरे पर थे. यह दौरा क्षेत्रीय तनाव के एक बड़े दौर का हिस्सा था, जिसमें ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य अभियान की चर्चा भी चल रही थी.

मुनीर के दौरे के दौरान तेहरान में क्या-क्या हुआ?

तेहरान में मुनीर ने ईरान की टॉप लीडरशिप से मुलाकात की. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुनीर ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष बाघेर गालीबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि मोहसिन रजाई से बातचीत की.

बातचीत का फोकस अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की शर्तें था. ईरान ने अपनी स्थिति बहुत साफ रखी. ईरान ने साफ कर दिया कि उसका एनरिच्ड यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाएगा और अमेरिका को बातचीत से पहले तेहरान की शर्तें पूरी करनी होंगी.

संसद अध्यक्ष गालीबाफ ने मुनीर को बताया कि अमेरिका ईरान का भरोसा तब तक नहीं जीत सकता जब तक वह न्यूयॉर्क में दी गई 7 शर्तें पूरी नहीं करता है.

यानी मुनीर की कोशिश थी कि वह ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करें, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया कि बातचीत तभी होगी जब अमेरिका पहले अपनी शर्तें पूरी करे.

तो मुनीर का दौरा ‘सफल’ या ‘खाली हाथ’ लौटे?

विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. ए के पाशा इसका जवाब दोनों तरफ से अलग-अलग बताते है:

  • पाकिस्तानी पक्ष: पाकिस्तान ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया. मुनीर ने सीमा खोलने की घोषणा की, जिसे एक ठोस उपलब्धि माना गया. पाकिस्तानी मीडिया ने इसे ‘अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को पुनर्जीवित करने’ की कोशिश करार दिया.
  • ईरानी पक्ष: ईरान ने मध्यस्थता की अटकलों को खारिज नहीं किया, लेकिन अपनी शर्तों पर कोई समझौता नहीं किया. ईरान ने साफ कर दिया कि वह यूरेनियम बाहर नहीं भेजेगा और अमेरिका के साथ बातचीत तभी करेगा जब उसकी सात शर्तें पूरी होंगी.

ए के पाशा ने कहा कि मुनीर ईरान से कोई बड़ी रियायत नहीं निकाल पाए, लेकिन सीमा खुलना और बातचीत का रास्ता बना रहना एक कूटनीतिक संकेत जरूर है. यह दौरा पाकिस्तान की उस कोशिश का हिस्सा था, जिसमें वह खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक जरूरी कड़ी के तौर पर स्थापित करना चाहता है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया कि वह अपनी शर्तों पर कोई समझौता नहीं करेगा.

नतीजा यह है कि तेहरान से मुनीर के हाथ में सीमा खुलने जैसी छोटी उपलब्धि तो आई, लेकिन ईरान-अमेरिका गतिरोध को तोड़ने वाला कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं निकला.



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