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H-1B वीजा से फिर बढ़ेंगी भारतीयों की मुश्किलें, क्या बोले एक्सपर्ट


अमेरिका के H-1B वीजा को लेकर भारतीयों की मुसीबतें फिर से बढ़ने वाली हैं. विदेशी मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि पहले ट्रंप प्रशासन ने 1 लाख डॉलर की फीस लगाई थी, जिसे अमेरिकी कोर्ट के एक जज ने खारिज कर दिया था. ऐसे में दोबारा ट्रंप प्रशासन ने अब फिर से कुछ कैलकुलेट करके कहा है कि इस बार 1 लाख 3 हजार 265 डॉलर की फीस लगाएंगे. 

रोबिंदर सचदेव ने बताया कि फिलहाल अभी इसे लागू नहीं किया गया है. उन्होंने अभी ये सिर्फ प्रस्ताव पास किया है. उन्होंने बताया कि इसे भी पहले की तरह अमेरिकी कोर्ट में चुनौती मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि ये एक तरह का टैक्स है और इसे लगाने की पावर अमेरिकी राष्ट्रपति के पास नहीं है. ये पावर अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि डोनाल्ड ट्रंप इसे लागू करने की पूरी कोशिश करेंगे.

क्या बोले जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी
H-1B वीजा को लेकर जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि जब तक डोनाल्ड ट्रंप पावर में हैं वो इसी तरह की पॉलिसी लाते रहेंगे. उन्होंने इसे भारत के लिए अप्रिय स्थिति करार देते हुए कहा कि ये भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है क्योंकि सबसे ज्यादा भारतीय ही इस वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं.

जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने कहा कि ऐसे में मुझे लगता है कि कुछ समय तक हमें ये सब बर्दाश्त करना पड़ेगा क्योंकि अमेरिकी की वर्तमान सरकार का व्यवहार भारत को लेकर दोस्ताना नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया ऐसे में अगले राष्ट्रपति के चुनाव तक हमें इतंजार ही करना होगा. हमारे पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है.

वीजा अपॉइंटमेंट पर भी रोक
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर के आवेदकों के वीजा अपॉइंटमेंट को लेकर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इमिग्रेशन पर डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीति के चलते ये कार्रवाई की गई है. अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि दुनियाभर में सभी अमेरिकी दूतावासों में एक ट्रेनिंग शुरू की गई है और इस ट्रेनिंग के लिए वीजा सेवाओं के अपॉइंटमेंट में बदलाव किया जाएगा. 

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