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Haridwar Kanwar Yatra 2026: दिव्यांग पति को कंधों पर बैठाकर 180 KM चली पत्नी, हरिद्वार में दिखी प्रेम और आस्था की अनोखी मिसाल


Haridwar Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक आस्था का पर्व कहना शायद इसके भाव को पूरी तरह व्यक्त नहीं करता. यह यात्रा विश्वास, त्याग, धैर्य और इंसानी रिश्तों की गहराई को भी सामने लाती है. हरिद्वार में इन दिनों लाखों शिवभक्त गंगाजल लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन इन्हीं श्रद्धालुओं के बीच एक ऐसा दंपति लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है, जिसकी कहानी सोशल मीडिया से लेकर यात्रा मार्ग तक हर किसी की जुबान पर है.

उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से आए इस दंपति आशा और सचिन ने यह साबित कर दिया कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में निभाए गए साथ में दिखाई देता है. दिव्यांग शिवभक्त के लिए उसकी पत्नी खुद सहारा बन गई है और उसे अपने कंधों पर बैठाकर लगभग 180 किलोमीटर की कठिन आस्था यात्रा तय कर रही है, ताकि दोनों मिलकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें.

पत्नी ने निभाया जीवनसाथी होने का असली अर्थ:

आमतौर पर कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अपने कंधों पर कांवड़ उठाकर चलते हैं, लेकिन इस यात्रा में एक पत्नी अपने पति को ही अपने कंधों पर लेकर आगे बढ़ रही है. यह दृश्य जहां भी लोग देख रहे हैं, वहीं रुककर इस दंपति का उत्साह बढ़ा रहे हैं.

दिव्यांग होने के कारण पति के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना आसान नहीं था. ऐसे में उनकी पत्नी ने यह जिम्मेदारी खुद उठाई और बिना किसी शिकायत के पूरे विश्वास के साथ यात्रा शुरू की. रास्ते की थकान, मौसम की चुनौतियां और लंबा सफर भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर पाया.

यात्रा के रास्ते पर मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस दंपति को देखकर भावुक हो रहे हैं. कई लोग उन्हें पानी, फल और अन्य जरूरी सामान देकर सहयोग भी कर रहे हैं.

आस्था के साथ प्रेम की भी मिसाल बनी यह यात्रा:

कांवड़ यात्रा में हर साल अलग-अलग तरह की प्रेरणादायक कहानियां सामने आती हैं, लेकिन इस दंपति की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसमें आस्था के साथ रिश्ते की मजबूती भी साफ दिखाई देती है.

पत्नी का कहना है कि उनके लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने जीवनसाथी के साथ भगवान शिव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है. उन्होंने अपने पति को कभी बोझ नहीं माना, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा साथी समझकर हर कदम पर उनका साथ निभाया.

वहीं दिव्यांग शिवभक्त भी अपनी पत्नी के इस समर्पण को भगवान शिव का आशीर्वाद मानते हैं. उनका कहना है कि पत्नी के सहयोग और विश्वास ने ही उन्हें यह कठिन यात्रा करने का साहस दिया.

रास्ते में लोग रुककर कर रहे हैं हौसला अफजाई:

हरिद्वार की ओर बढ़ते इस दंपति को देखने के लिए राहगीर रुक रहे हैं. कई श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, जबकि कुछ लोग भगवान भोलेनाथ से उनकी यात्रा सफल होने की प्रार्थना कर रहे हैं.

कई लोगों का कहना है कि आज के समय में जहां रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर दूरियां बढ़ जाती हैं, वहां यह दंपति यह संदेश दे रहा है कि सच्चा रिश्ता परिस्थितियों से नहीं, बल्कि भरोसे, सम्मान और साथ निभाने के संकल्प से मजबूत होता है.

सोशल मीडिया पर भी लोग कर रहे हैं सराहना:

इस अनोखी आस्था यात्रा की चर्चा यात्रा मार्ग के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हो रही है. लोग इसे प्रेम, समर्पण और विश्वास की मिसाल बताते हुए दंपति की सराहना कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि यह कहानी समाज को रिश्तों की असली ताकत समझाने वाली है.

कांवड़ यात्रा ने दिया इंसानियत और रिश्तों का संदेश:

कांवड़ यात्रा केवल गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने तक सीमित नहीं है. यह लोगों को धैर्य, सेवा, सहयोग और समर्पण का भी संदेश देती है. मोदीनगर से हरिद्वार तक 180 किलोमीटर की यह यात्रा उसी भावना का जीवंत उदाहरण बन गई है.

यह दंपति बता रहा है कि अगर जीवन में विश्वास, प्रेम और एक-दूसरे का साथ हो, तो सबसे कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं. भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और जीवनसाथी के प्रति समर्पण की यह कहानी आने वाले समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी.

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