Karwa Chauth 2026 Live: करवा चौथ का पावन पर्व हर सुहागिन के लिए सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का खूबसूरत उत्सव है. सुबह भोर में सरगी खाने के बाद से ही घर-आंगन में पूजा की तैयारियां, हाथों में सजी मेहंदी की महक और शाम के इंतज़ार का उत्साह साफ झलकता है.
दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद सभी की निगाहें आसमान पर टिक जाती हैं, क्योंकि इस दिन का असली आकर्षण ही वो रूपहला चांद है जिसके दर्शन के बाद यह कठिन तप पूरा होता है.
शाम को शुभ मुहूर्त में करवा माता और पूरे शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा की जाती है. सोलह श्रृंगार में सजी महिलाएं एक साथ बैठकर पारंपरिक व्रत कथा सुनती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.
जैसे ही आसमान में चांद की चमक बिखरती है, छलनी की ओट से चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल पीकर व्रत का पारण होता है.
करवा चौथ 2026 की सही तारीख: 28 या 29 अक्टूबर?
हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को लेकर तिथियों के घटने-बढ़ने से असमंजस की स्थिति बन जाती है.
- तिथि की शुरुआत व समाप्ति: कार्तिक चतुर्थी तिथि की शुरुआत 28 अक्टूबर को दोपहर बाद से हो रही है और यह 29 अक्टूबर की शाम तक रहेगी.
- चंद्रोदय व्यापिनी नियम: करवा चौथ का व्रत उस दिन रखा जाता है जिस रात चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय (चांद का निकलना) मौजूद हो.
- सही और मान्य तारीख: 28 अक्टूबर की रात को ही चतुर्थी तिथि में चांद निकलेगा, इसलिए शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ का निर्जला व्रत 28 अक्टूबर 2026 को ही रखा जाएगा. 29 अक्टूबर की रात चांद निकलने से पहले ही पंचमी तिथि लग जाएगी, इसलिए व्रत 28 तारीख को ही फलदायी है.
पूजा की तैयारी: सामग्री लिस्ट, थाली और शुभ मुहूर्त:
करवा चौथ की पूजा शाम को प्रदोष काल में पूरे विधि-विधान से की जाती है. सही मुहूर्त और पूरी थाली के साथ पूजा करने से मन में शांति और संतोष रहता है.
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम की पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय शाम 5:35 बजे से शाम 6:54 बजे के बीच रहेगा. इस 1 घंटे 19 मिनट की अवधि में करवा माता और शिव परिवार की पूजा सर्वोत्तम मानी गई है.
थाली में क्या-क्या रखें:
सींक वाला मिट्टी या पीतल का करवा (उसमें कलावा बांधें और साफ जल या गेहूं भरें).
- पूजन सामग्री: रोली, अक्षत (अटूट चावल), चंदन, हल्दी की गांठ, कलावा, धूप, अगरबत्ती और देसी घी का दीपक.
- भोग सामग्री: 8-10 मीठी पूरियां (या मठरी), फल, मिठाई और करवा माता को चढ़ाने के लिए बायना.
- चंद्र अर्घ्य के लिए: एक लोटा जल, कच्चा दूध, सफेद फूल और सबसे जरूरी—पूजा वाली छलनी.
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