Why Soaking Dal Before Cooking Is Important: दाल रोज के खाने का अहम हिस्सा है, लेकिन कई बार इसे बनाने के बाद भी दाल अच्छी तरह गलती नहीं है. कुछ दालें जल्दी पक जाती हैं, जबकि कुछ को पहले भिगोने पर ही बेहतर नतीजा मिलता है. खासकर साबुत दालों और कुछ मोटे दानों वाली दालों को सीधे पकाने के बजाय कुछ देर पानी में भिगोना फायदेमंद रहता है. इससे दाल को पकने में कम समय लग सकता है और वह ज्यादा आसानी से गल जाती है.
हालांकि, हर दाल को घंटों भिगोने की जरूरत नहीं होती. दाल किस तरह की है, इसके आधार पर भिगोने का समय तय करना चाहिए. कुछ फूटी हुई दालों के लिए 30 मिनट से 1 घंटे तक का समय पर्याप्त हो सकता है, जबकि साबुत दालों को इससे ज्यादा समय देना पड़ सकता है.
30 मिनट भिगोने से क्या फायदा होता है?
दाल को पानी में भिगोने से उसके दाने पानी सोखने लगते हैं. इससे दाल नरम होती है और पकाते समय पानी और गर्मी उसके अंदर तक आसानी से पहुंच पाती है. नतीजा यह होता है कि दाल अपेक्षाकृत जल्दी और समान रूप से पक सकती है. अगर आप फूटी हुई दाल को बिना भिगोए सीधे पकाते हैं, तो वह भी आमतौर पर पक जाती है, लेकिन थोड़ी देर भिगोने से पकाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है. खासकर जब दाल पुरानी हो या उसके दाने थोड़े सख्त हों, तब भिगोना ज्यादा उपयोगी हो सकता है.
कौन-सी दालें 30 मिनट भिगो सकते हैं?
धुली और फूटी हुई दालों को आमतौर पर बहुत लंबे समय तक भिगोने की जरूरत नहीं होती. मूंग दाल जैसी कुछ जल्दी पकने वाली दालें बिना भिगोए भी आसानी से पक सकती हैं. लेकिन अगर आप इन्हें पहले से भिगोते हैं, तो 30 मिनट से 1 घंटे का समय काफी हो सकता है. मसूर दाल और दूसरी फूटी हुई दालों के मामले में भी जरूरत के अनुसार थोड़ी देर भिगोना उपयोगी हो सकता है. अगर दाल के दाने पुराने हैं या आपको लगता है कि वे जल्दी नहीं गलेंगे, तो भिगोने से फायदा मिल सकता है.
साबुत दालों को ज्यादा समय चाहिए
साबुत उड़द, साबुत मसूर या दूसरी साबुत दालों के दाने फूटी हुई दालों की तुलना में ज्यादा सख्त होते हैं. इसलिए इन्हें सिर्फ 30 मिनट भिगोना हमेशा पर्याप्त नहीं होगा. साबुत दालों को करीब 2 घंटे या उससे ज्यादा समय तक भिगोया जा सकता है. इससे दाने अच्छी तरह पानी सोखते हैं और पकने में आसानी होती है. राजमा, छोले और चने जैसी साबुत फलियों को तो आमतौर पर कई घंटे भिगोने की जरूरत होती है. इन्हें रातभर या करीब 8 से 12 घंटे तक भिगोना आम तरीका है. इसलिए इनके लिए 30 मिनट का समय पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए.

दाल भिगोने का सही तरीका क्या है?
सबसे पहले दाल को अच्छी तरह छांट लें और उसमें मौजूद कंकड़ या खराब दाने अलग कर दें. इसके बाद दाल को पानी से अच्छी तरह धोएं. पानी बदलकर दो-तीन बार हल्के हाथ से धोना बेहतर रहता है. अब दाल को एक साफ बर्तन में डालकर पर्याप्त पानी भर दें. ध्यान रखें कि दाल पानी सोखकर फूल सकती है, इसलिए पानी की मात्रा बहुत कम न रखें. फूटी हुई दाल के लिए करीब 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोना काफी हो सकता है, जबकि साबुत दाल को ज्यादा समय दिया जा सकता है. भिगोने के बाद पानी निकाल दें और दाल को एक बार फिर साफ पानी से धो लें.
भिगोया हुआ पानी क्यों फेंक देते हैं?
दाल और फलियों में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं जो पाचन में परेशानी या गैस जैसी समस्या से जुड़े हो सकते हैं. भिगोने के दौरान इनमें से कुछ पानी में निकल सकते हैं. इसी वजह से कई लोग भिगोने के बाद उस पानी को फेंककर दाल को ताजे पानी से पकाते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दाल को भिगोना हर व्यक्ति के लिए पाचन संबंधी समस्या का पक्का समाधान है. यह सिर्फ खाना तैयार करने का एक सामान्य तरीका है.
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ज्यादा देर तक भिगोने की भी जरूरत नहीं
दाल को जरूरत से ज्यादा समय तक पानी में छोड़ना जरूरी नहीं है. खासकर गर्म मौसम में बहुत लंबे समय तक भिगोकर रखने से दाल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसलिए मौसम और दाल के प्रकार के हिसाब से समय तय करें. अगर दाल जल्दी पकने वाली है, तो सिर्फ थोड़ी देर भिगोना पर्याप्त हो सकता है. वहीं साबुत दाल और चने जैसी फलियों को ज्यादा समय चाहिए.
अगर दाल फिर भी नहीं गल रही तो?
कई बार सही तरीके से भिगोने के बाद भी दाल देर से गलती है. इसकी एक वजह दाल का पुराना होना हो सकती है. पुरानी दाल के दाने ज्यादा सख्त हो सकते हैं और उन्हें पकने में अधिक समय लग सकता है. इसलिए दाल खरीदते समय बहुत पुराना स्टॉक लेने से बचें और उसे सूखी, साफ जगह पर अच्छी तरह बंद करके रखें.
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