मुंबई में एक बार फिर मराठी भाषा को लेकर मामला गरमाया हुआ है, मुंबई की दुकानों और प्रतिष्ठानों पर मराठी भाषा में साइनबोर्ड नहीं लगाने पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने कार्रवाई की है. सरकार ने विधानसभा में विधायक के सवालों का जवाब देते हुए यह जानकारी दी है.
दरअसल, मुंबई की दुकानों और प्रतिष्ठानों पर मराठी भाषा में साइनबोर्ड लगाने के नियमों के पालन को लेकर विधायक संतोष दानवे ने विधानसभा सवाल उठाया था. विधायक के सवालों के लिखित जवाब में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि मराठी (देवनागरी) में साइनबोर्ड लगाना कानूनन अनिवार्य है और सुप्रीम कोर्ट ने भी 25 सितंबर 2023 को इसके पालन का निर्देश दिया था.
4 जून 2026 तक 10 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण
सरकार के अनुसार, नवंबर 2023 से 4 जून 2026 तक बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने 10 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया. सरकार ने बताया कि प्रमुख सड़कों पर स्थित 2,00,067 प्रतिष्ठानों में से 1,93,747 पर मराठी नामपट्ट मिले, जबकि 6,320 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई.
3,861 प्रतिष्ठानों से वसूला गया जुर्माना
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में बताया कि इनमें 3,861 प्रतिष्ठानों से ₹1.95 करोड़ से अधिक जुर्माना वसूला गया, 1,003 प्रतिष्ठानों ने ₹1.02 करोड़ कंपाउंडिंग फीस भरकर मामला निपटाया, जबकि 1,456 मामले अभी न्यायालय में लंबित हैं.
सरकार ने स्वीकार की अधिकारियों की कमी की बात
अधिकारियों की कमी के सवाल पर सरकार ने स्वीकार किया कि 121 स्वीकृत पदों में केवल 53 अधिकारी कार्यरत हैं और 68 पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. सरकार ने यह भी बताया कि 14 मई से 4 जून 2026 तक विशेष जांच अभियान चलाया गया और मराठी नामपट्ट को लेकर जनजागरण अभियान भी जारी है.
आपको बता दें कि मराठी (देवनागरी) में साइनबोर्ड लगाना कानूनन अनिवार्य है और सुप्रीम कोर्ट ने भी 25 सितंबर 2023 को इसके पालन का निर्देश दिया था. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बीएमसी की ओर से जुर्माना आदि की कार्रवाई भी जारी है.
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